Napoo Healing

Napoo Healing by Napoo Foundation

Hindi

Spiritual articles in hindi about Napoo healing by Vijay Batra ‘Karmalogist’

Napoo Foundation, New Delhi, INDIA

Napoo Foundation की स्थापना करने वाले श्री विजय बतरा Karmalogist कहते हैं कि हमारा शरीर पंचतत्वों (अग्नि, वायु, जल, पृथ्वी और आकाश) से बना है इसलिए जब किसी व्यक्ति को कोई नकारात्मक शक्ति हानि करती है तब हमारे शरीर के तत्व असंतुलित हो जाते हैं जो मानसिक, शारीरिक और आर्थिक समस्याओं का कारण बनते है ।

दूसरों की नकारात्मक ऊर्जा का हमारे जीवन से बहुत गहरा सम्बन्ध है क्योंकि हमारे जीवन में उत्पन्न होने वाली अधिकतर समस्याएं दूसरों के कारण ही होती है | दूसरों के विचार, दूसरों की गति और दूसरों का स्वभाव, हमारे तत्वों को प्रभावित करके हमारे जीवन को गुप्त रूप से संचालित करता है |

आकाशगंगा में स्थित ग्रह भी अपनी सूक्ष्मकिरणों द्वारा हमारे शरीर के तत्वों को निरंतर प्रभावित करती है जिससे हमें प्रतिदिन नई समस्या का सामना करना पड़ता है | इसी प्रकार पृथ्वी ग्रह और पृथ्वी पर स्थित सभी जीवों और वस्तुओं द्वारा हमारे शारीरिक तत्व असंतुलित होते रहते है |

शरीर के सभी तत्वों को संतुलित करने के लक्ष्य से श्री बतरा जी ने वर्ष 2004 में तत्व आधारित Napoo healing पद्धति विकसित की है इस तात्विक हीलिंग पद्धति से ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव और दूसरों द्वारा होने वाली हानि अपने आप समाप्त हो जाती है |

श्री बतरा जी ने कई सालों तक तत्व विज्ञान की खोज करके समस्या के आधार पर तत्व प्रयोग विधि विकसित की है जो यह सुनिश्चित करती है कि कौन सी समस्या के लिए किस तत्व का (कितना और कैसे) प्रयोग करना चाहिए | किसी समस्या के लिए तत्वविधि को विकसित करके उसको प्रयोग करने वाले विश्व भर में एकमात्र व्यक्ति श्री बतरा जी है |

Napoo तात्विक हीलिंग पद्धति द्वारा ग्रहों के नकारात्मक फल और बुरी नज़र(Evil eye), टोना-टोटका(Black Magic), मंत्रघात(Spells) श्राप(Curse) प्रेतात्मा(Spirit) से स्थायी रूप से छुटकारा मिलता है | Napoo हीलिंग का किसी धर्म से कोई सम्बन्ध नहीं है यह किसी भी व्यक्ति को उसके धार्मिक या आध्यात्मिक विश्वासों को बदलने के लिए नहीं कहता है और यह healing अन्य सभी प्रकार की healings और अनुष्ठानों से बिलकुल अलग है |

विजय बतरा Karmalogist द्वारा विकसित तत्व आधारित Napoo healing पद्धति के पीछे मूल अवधारणा यह है कि अगर शरीर के सभी तत्व संतुलित होते हैं तो जीवन में कभी भी कोई समस्या नहीं होगी, इसीलिए विश्व भर में Napoo अपने अद्वितीय परिणामों के कारण बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है |

 

नापू उपचार नियम

Napoo यन्त्र लगाकर, हाथ में अंगूठी, गले में किसी धागे या ताबीज का प्रयोग करना वर्जित है |

Napoo तात्विक उपायों को करते समय सभी प्रकार के अन्य उपाय करना वर्जित है |

Napoo द्वारा सम्पूर्ण सुरक्षा के लिए कोई भी यंत्र रखना, मंत्र पढना या पूजा करना वर्जित है |

 

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Napoo Foundation, New Delhi, INDIA

Founder Vijay Batra Karmalogist

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यंत्रों से निकलती है नकारात्मक ऊर्जा !

यंत्र का उपयोग किसी विशेष कार्य को पूर्ण होने या इच्छा की सिद्धि के लिए किया जाता है | सभी प्रकार के यंत्रों पर इच्छित कार्य के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रकार के आकार बने होते है जिनकी अपनी ऊर्जा शक्ति होती है |

यंत्रों पर भिन्न-भिन्न अक्षर या अक्षरों से शब्द अथवा वाक्य/मंत्र होते है, सभी अक्षरों का अपना-अपना वास्तविक ध्वनी कम्पन होता है | ध्वनी कम्पन से विशेष तरंगें निकलती है जो किसी इच्छा सिद्धि के लिए बहुत अधिक सहायक होती है |

यंत्रों में धातु और रंगों का भी प्रयोग होता है, प्रत्येक धातु का अपना बल प्रभाव होता है इसी प्रकार सभी रंगों का भी अपना सांसारिक महत्त्व है | किसी यंत्र के निर्माण के लिए आकर, रेखाचित्र, अक्षर, धातु और रंग आवश्यक होते है|

बिंदु, रेखा, त्रिकोण, चतुर्भुज, पंचभुज, षष्टकोण, सप्तकोण, अष्टकोण, घेरा इत्यादि का आपस में समानता नहीं है इसलिए इनका प्रभाव भी सामान नहीं है | इसी प्रकार सभी अक्षरों का ध्वनी कम्पन भी एक दूसरे से भिन्न है |

यंत्रों का अधिकतम प्रयोग धन के लिए, बीमारी से छुटकारा पाने के लिए, अकारण परेशानियों से मुक्ति के लिए और भूत प्रेत व नकारात्मकता से बचने के लिए किया जाता है | कुछ लोग यंत्रों को गले या अंगूठी में भी धारण कर लेते है |

सकारात्मक फल की इच्छा से रखे गए यंत्र का नकारात्मक प्रभाव भी होता है क्योंकि प्रकृति का नियम है कि संसार की सभी वस्तुओं का प्रभाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनो ही प्रकार का होता है | यह अलग बात है कि व्यक्ति केवल लाभ को ही देखता है | एक कार्य के लिए दो भिन्न – भिन्न प्रकार के यंत्रों को रखने से उनकी ऊर्जा शक्ति,  ध्वनी कम्पन और बल आपस में टकराने के कारण नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है जिससे कार्यों में सफलता नहीं मिलती बल्कि रुकावट होती है |

एक स्थान पर अनेकों यंत्रों की ऊर्जा शक्ति के प्रभाव से व्यक्ति के निजी सुखों पर नकारात्मक पड़ता है | अनेकों प्रकार की ऊर्जाओं से उत्पन्न नकारात्मकता भूत-प्रेत इत्यादि दुष्ट शक्तियों का प्रभाव भी अधिक करती है |

सावधानियां :

एक से अधिक यंत्र कभी भी ना रखें |

कार्य सिद्धि के पश्चात यंत्र को हटा दें |

रेखाचित्र की ऊर्जाशक्ति अवश्य जांच करें |

अक्षर की ध्वनी कम्पन अवश्य जांच करें |

यंत्र प्रयोग से पहले उचित सलाह अवश्य लें |

यंत्र का लाभ तभी है जब उससे सम्बंधित उचित अक्षर अथवा शब्द का उच्चारण किया जाए | यंत्र और शब्द का आपस में मेल नहीं होने से भी यंत्रों से नकारात्मक ऊर्जा निकलती है | 

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मंत्रजाप से बढ़ता है गुस्सा !

मान्यता है कि मंत्रजाप अथवा किसी पूजा पाठ करने से मन निर्मल और शांत रहता है इसीलिए अधिकतर लोग अपनी दिनचर्या किसी मंत्रजाप या पूजा पाठ से आरम्भ करते है | यह भी कहा और माना जाता है कि मंत्र पढने से घर में प्रेम और सुख समृद्धि का वास होता है |

प्रतिदिन अनेकों लोग मुझे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए व्यक्तिगत रूप से मिलते है जो यह कहते है कि उनके घर में अधिक मंत्रजाप, नाम उच्चारण और पूजा पाठ होता है फिर भी परिवारजनों में गुस्सा है जिससे घर का वातावरण नकारात्मक और अशांति वाला है |

मेरे निजी अनुभव से मंत्रजाप के बाद भी गुस्से और अशांति के दो मुख्य कारण होते है:

  • लक्ष्यहीन मंत्रजाप और पाठ पूजा करना |
  • मंत्रजाप वाले स्थान पर नकारामक शक्ति का प्रभाव होना |

कुछ लोग बिना किसी लक्ष्य के कोई मंत्रजाप अथवा पूजा को सालों तक करते रहते है | इस बात का उन्हें स्वयं भी पता नहीं होता है कि किस मंत्र, नाम या पाठ-पूजा को कितने समय के बाद नहीं करना चाहिए या उसे विराम देना अति आवश्यक है |

सभी लोग यह जानते है कि कोई भी मंत्र, नाम, पाठ इत्यादि उच्चारण करने से ऊर्जा का प्रवाह होता है परन्तु लगभग सभी लोगों को यह ज्ञान नहीं है कि मंत्र, नाम इत्यादि पढने से जो ऊर्जा बनती है उसका सकारात्मक प्रयोग कैसे किया जाता है |

किसी मंत्रजाप से उत्पन्न हुई ऊर्जा का सकारात्मक प्रयोग नहीं कर पाने के कारण ही उसका नकारात्मक प्रभाव मंत्रजाप करने वाले व्यक्ति और उसके घर पर पड़ता है जिसका पहला मुख्य लक्षण गुस्सा आना और अशांति होना है |

मंत्रजाप से पहले लक्ष्य होना और मंत्रजाप से बाद इसकी ऊर्जा का सकारात्मक प्रयोग पता होना अति आवश्यक है अन्यथा मंत्रजाप से किसी बड़ी हानि होने की संभावना भी होती है क्योंकि आवश्यकता से अधिक मंत्रजाप से उत्पन्न ऊर्जा, पारिवारिक सुख से वंचित करने में सक्षम होती है |

इस बात का ज्ञान भी सभी को नहीं है कि नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होने पर बुरी नज़र, टोना टोटका, भूत प्रेत इत्यादि को अधिक बल मिलता है | लोगों को ईश्वर से यह शिकायत भी रहती है कि अधिक मंत्रजाप या पूजा पाठ करके भी नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव समाप्त नहीं होता है |

इस बात पर सभी को विशेष ध्यान देना चाहिए कि दैनिक क्रियाओं में कैसे कर्म करना चाहिए और कैसे कर्म नहीं करना चाहिए | कहीं ऐसा तो नहीं कि मंत्रजाप या पाठ-पूजा के कारण ही समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं |

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मंत्रों का नकारात्मक प्रभाव !

संसार का प्रत्येक धार्मिक व्यक्ति किसी ना किसी मंत्र का उच्चारण अवश्य करता है | ऐसा प्रचलित है कि प्रत्येक मंत्र उच्चारण का अपना एक प्रभाव होता है जिससे वायुमंडल में सकारात्मक मंत्रशक्ति सक्रिय हो जाती है जिससे इच्छित फल की प्राप्ति होती है | ऐसी धारणा है कि सही उच्चारण से मंत्र का नकारात्मक प्रभाव कभी नही होता परन्तु यह पूर्ण सत्य नहीं है |

जब व्यक्ति समस्याओं से घिरा होता है तो वह जगह-जगह जाकर उपाय पूछता है जिसके लिए उसे कोई मंत्र दिया जाता है कि इसका जाप करने से समस्याओं का अंत होगा और जीवन में सुख-समृद्धि आएगी | मंत्रशक्ति के सक्रियता के कारण मंत्र का उच्चारण करने वाले अधिकतर लोग स्वयं और आसपास के माहौल में सकारात्मकता का अनुभव भी करते है |

व्यक्ति द्वारा मंत्रों से स्वयं उत्पन्न की गयी मंत्रशक्ति में सकारात्मक प्रभाव के साथ-साथ मंत्र का नकारात्मक प्रभाव भी होता है परन्तु साधारण व्यक्ति को मंत्रों की नकारात्मकता के बारे में ज्ञान नहीं है | संसार के कुछ ही लोगों को यह ज्ञान है कि मंत्रो का नकारात्मक प्रभाव भी होता है | मंत्रों के अधिक उच्चारण से व्यक्ति की समस्या समाप्त होने के स्थान पर एक और नयी समस्या उत्पन्न हो जाती है |

मंत्रों का उच्चारण लाखों वर्षों से हो रहा है फिर भी पुराने समय की तुलना में आज के समय में व्यक्ति की समस्याएं और दुविधाएं पहले से कई गुना अधिक है | यदि मंत्रों का केवल सकारात्मक प्रभाव ही होता तो बीते लाखों वर्षों में मनुष्यों द्वारा किए गए मंत्रो के उच्चारण से वायुमंडल में मंत्रशक्ति इतनी सक्रीय होती कि संसार के किसी व्यक्ति को कोई समस्या ही नहीं होती |

किसी मंत्र द्वारा किसी वस्तु को प्राप्त करने के साथ-साथ किसी दूसरी प्राप्त वस्तु की हानि होना निश्चित है| एक वस्तु को पाने के लिए उच्चारण किया गया मंत्र दूसरी वस्तु का अंत करता है क्योंकि मंत्रशक्ति सकारात्मक भी है और नकारात्मक भी है | किसी भी मंत्र का उच्चारण करने से पहले व्यक्ति को किसी सांसारिक सुख की हानि सहने के लिए तैयार रहना चाहिए |

किसी जीवित या मृत व्यक्ति का नाम बार-बार लेने से भी एक प्रकार की ऊर्जा उत्पन्न होती है जिससे लाभ और हानि दोनों होते है | जिस व्यक्ति का नाम लिया गया है उसके विचार,  गुण-अवगुण, रहन-सहन और उस पर सांसारिक प्रभाव, uska नाम लेने वाले पर भी hoता है | सांसारिक सुखों की प्राप्ति के लिए ऐसे व्यक्ति के नाम का उच्चारण नहीं करना चाहिए जिसका स्वयं का जीवन संघर्षमयी हो |

सूर्य की ऊर्जा पृथ्वी के वातावरण के कारण लाभकारी है परन्तु इसकी ऊर्जा की अधिकता में भस्म करने की क्षमता है, इसी प्रकार मंत्र उच्चारण की अधिकता में सांसारिक सुखों की हानि करने की क्षमता है | जिस मंत्र के उच्चारण में लाभ का स्वार्थ होगा उसमे हानि अवश्य होगी | लाभ में हानि है और हानि में लाभ है |

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Spells मंत्रघात से हानि और उपचार !

लगभग सभी लोग बुरी नज़र, जादू-टोना, भूत-प्रेत, नकारात्मकता इत्यादि के बारे में जानते है परन्तु अधिकतर लोगों को अभी तक मंत्रघात बारे में अधिक जानकारी नहीं है क्योंकि मंत्रघात इन सबसे भिन्न व अधिक रहस्यमयी है और इसकी जानकारी पुस्तकों में और इन्टरनेट पर उपलब्ध नहीं है | मंत्रघात अति प्रभावशाली होने पर भी प्रचलित नहीं है क्योंकि इसका प्रयोग साधारण व्यक्ति अनजाने में गुप्त तरीके से कर देता है |

पिछले अनेकों वर्षों से मैं आध्यात्मिक और अदृश्य संसार पर काम कर रहा हूँ,  इसी कारण मैंने अपनी शोध की हुई बहुत सारी रहस्यमयी जानकारी को विडियो, लेखों, पुस्तकों तथा इन्टरनेट के माध्यम से सभी तक पहुंचाने का प्रयास किया है | जब किसी व्यक्ति को ऐसे लक्षण हो जो बुरी नज़र नहीं है, ना ही किसी जादू-टोने का प्रभाव से है और जो भूत प्रेत इत्यादि के कारण से भी नहीं है तब यह मंत्रघात होने का लक्षण होता है और मंत्रघात केवल हानि करती है |

  • मंत्रघात अनजाने में ही क्यों और कैसे होता है ?
  • मंत्रघात होने पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए ?

मंत्रघात ऐसी नकारात्मक शक्ति है जो व्यक्ति की इच्छा और लक्ष्य के कारण सकारात्मक मंत्रों द्वारा उत्पन्न होती है और यह केवल हानि करती है इसमें एक मुख्य बात यह भी है कि इसका प्रयोग अधिकतर लोग ज्ञान की कमी के कारण अनजाने में ही करते है और यह रहस्य समझने कि आवश्यकता है कि अनजाने में हुए मंत्रघात से व्यक्ति को स्वयं भी उतनी ही हानि होती है जितनी हानि दूसरों को होती है |

इसके कारण जीवन में अकारण समस्याएं और नकारात्मकता का सामना करना पड़ता है | मंत्रघात अति गुप्त विज्ञान है जिसके बारे में अधिकतर लोगो को ज्ञान नहीं है क्योंकि यह कोई ज्योतिषीय या तांत्रिक मंत्र, विधि या उपाय नहीं है इसी कारण प्रचलित उपाय, मंत्र, विधि, टोटकों इत्यादि से कोई भी लाभ नहीं मिलता | किसी समस्या के लिए व्यक्ति द्वारा किए गए अधिकतर मंत्र और उपाय इसलिए भी निष्फल हो जाते है क्योंकि मंत्रघात के प्रभाव को समाप्त करने और इससे बचने के लिए युति का सटीक ज्ञान अधिकतर लोगों को नहीं है | मंत्रघात से हो रही हानि से बचने के लिए सटीक ज्ञान और अति गोपनीयता से कार्य करने की आवश्यक है |

मंत्रघात के मुख्य लक्षण :

  • किसी भी मंत्र के उच्चारण से नकारात्मकता और समस्याओं का बढना
  • मुख से निकली सभी प्रकार की नकारात्मक बातों का सच हो जाना
  • धार्मिक क्रियाओं और पुण्य कर्मों का बिलकुल भी लाभ नहीं मिलना
  • किसी का कोई रोग या पीड़ा सुनकर, वही समस्या स्वयं को हो जाना

Napoo : विश्व की एकमात्र ऐसी healing प्रणाली है जिसमें भूत-प्रेत, बुरी नज़र, जादू-टोने का समस्त ज्ञान होने के साथ-साथ मंत्रघात का भी समस्त ज्ञान है | मंत्रघात के लक्षण होने पर इसके प्रभाव को अति शीघ्र समाप्त करना आवश्यक है क्योंकि इसका प्रभाव सभी प्रकार के सांसारिक सुखों से वंचित रखता है |

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उपायों का नकारात्मक प्रभाव !

मुझे प्रतिदिन अनेकों लोग अपनी समस्याओं के समाधान या आध्यात्मिक ज्ञान एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए संपर्क करते है | उनमे ऐसे भी कई सज्जन और देवियाँ है जो ज्योतिष, रेकी, इत्यादि विज्ञानों की सहायता से लोगो की समस्याओं के लिए उपाय बताते है और कुछ ऐसे भी हैं जो गद्दी लगा कर लोगों की समस्याओं का समाधान उपाय बताकर या स्वयं करते है |

पिछले कई सालों के अनुभव और निजी शोध द्वारा मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूँ कि मार्गदर्शक का कार्य करने वाले लोगों को उपाय बताने के बदले गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है | इनमे मुख्य समस्या उनका स्वास्थ्य या पारिवारिक सुख की कमी है | इसका मुख्य कारण यह है कि मार्गदर्शक के पास आने वाले व्यक्ति को बताये गए उपाय के साथ-साथ मार्गदर्शक स्वयं कोई उपाय नहीं करता | मार्गदर्शक व्यक्ति जिस भी ग्रह या देव का उपाय बताता है वह स्वयं उस ग्रह या देव के लिए कोई उपाय नहीं करता, कभी कभी तो मार्गदर्शक जिस ग्रह या देव के उपाय बताता है उनमे उसकी स्वयं की आस्था ही नहीं होती |

मार्गदर्शक उपाय बताकर बाधा समाप्त करने का यत्न करता है और यह समझता है कि ऐसा करना मेरा व्यवसाय है जिसके बदले मैंने धनराशी ले ली है और जातक की समस्या दूर होने पर मुझे अतिरिक्त लाभ पुण्यकर्म के रूप में भी मिलेगा | यदि ऐसा होता तो उपाय बताने या किसी बाधा पर कार्य करने वालों को तो कभी कोई समस्या ही नहीं होती क्योंकि उनके पुण्यकर्म तो दिन प्रतिदिन बढ़ रहे है | हम सभी जानते है कि संसार कर्मों के लेनदेन से चलता है जब तक लेनदेन समाप्त नहीं होता तब तक आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती | मार्गदर्शक जिस भी ग्रह या देव का उपाय बताता है वह ग्रह या देव उस ग्रसित व्यक्ति को तभी छोड़ेंगे जब उनका हिसाब मार्गदर्शक स्वयं दे |

ऐसा भी कहा जाता है कि ग्रह या देव पूजा अर्चना से प्रसन्न होते है साथ ही यह भी कहा जाता है कि स्वार्थ में की गयी पूजा अर्चना का कोई लाभ नहीं होता, ऐसी पूजा अर्चना करने से तो नहीं करना अच्छा है| ग्रह या देव मार्गदर्शक के संबंधी नहीं हैं ना ही उसके सेवक है कि उसके बताये उपाय को करने से व्यक्ति की बाधा/समस्या भी दूर हो जाये और कर्मफल समाप्त भी हो जाये | कर्मफल को समाप्त करने के लिए समस्या ग्रसित व्यक्ति के साथ साथ मार्गदर्शक अपनी ऊर्जा को कर्मफल समाप्त करने में लगाये तो ही वह उपायों के नकारात्मक प्रभाव से बच सकता है, अधिकतर मार्गदर्शक ऐसा नहीं करते |

यहाँ तक कि एक बड़ी संख्या को तो यह भी नहीं मानती क्योंकि उन्हें इस बात का ज्ञान ही नहीं है कि उन पर उपाय बताने से कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ता है जबकि किसी का कार्य पूरा होने पर पुण्यकर्म पर अधिकार समझते है | यदि किसी का सही मार्गदर्शन करने से सकारात्मक प्रभाव है तो कर्मफल मिलने में बाधा बनने पर नकारात्मक प्रभाव भी है |

यदि किसी का सही मार्गदर्शन करने से सकारात्मक प्रभाव है तो कर्मफल मिलने में बाधा बनने पर नकारात्मक प्रभाव भी है | आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो हर कर्म का एक फल होता है और वह फल तब तक समाप्त नहीं होता जब तक उसको पूरा भोगा नहीं जाये | जब कोई व्यक्ति मार्गदर्शक द्वारा बताई गयी विधि, उपाय, दान, पूजा इत्यादि को श्रद्धा से करता है तो उसकी बाधा/समस्या का प्रभाव मार्गदर्शक पर पड़ता है, क्योंकि मार्गदर्शक ने उस व्यक्ति और बाधा की मध्यस्था की है इसलिए उसे भी बाधा का एक भाग अवश्य भोगना पडता है |

व्यक्ति का बिना भोगा कर्मफल मार्गदर्शक के हिस्से में आता है जिसके प्रभाव से मार्गदर्शक के जीवन में ऐसी समस्याएं भी आती है जो उसके भाग्य की नहीं होती हालाँकि दूसरे के कर्मफल को भोगने से पुण्यकर्म भी बनता है परन्तु सकारात्मक प्रभाव शीघ्र खर्च होता है | प्रत्येक मार्गदर्शक को स्वयं का इतना ज्ञान तो होता ही है कि वह कितने पानी में है और वह स्वयं कितनी कर्मपूँजी कमाता और खर्च करता है |

मार्गदर्शक जो भी उपाय बताता है उस उपाय का एक भाग उसे स्वयं भी करना चाहिए क्योंकि कर्मफल को भोग कर समाप्त करने की जवाबदेही मार्गदर्शक की होती है | यदि वह ऐसा नहीं करता तो इस जन्म या अगले किसी जन्म में दूसरों के भाग्य के कर्मफल उसके साथ साथ चलते है | ऐसे अनेकों व्यक्तियों से मेरी बात होती है जिनका यह कहना होता है है कि उन्होंने अपने जीवन काल में किसी का मन नहीं दुखाया और ना ही ऐसा कोई कर्म किया है जिसका उन्हें ऐसा दंड मिले | पुराने समय में एक गुरु होता था, जिसका कोई स्वार्थ नहीं होता था, जिसकी अपनी कर्मपूंजी इतनी होती थी कि अनेकों गावों का भला करने और कर्मफल को समाप्त करने की शक्ति होती थी | वर्तमान काल के कहे जाने वाले गुरु ना ही कर्मपूंजी पर ध्यान देते है ना ही शक्ति जागृत करने पर ध्यान देते है | मेरा ध्येय किसी की निंदा करना नहीं है, केवल सही मार्गदर्शन करना है |

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समस्या के लिए प्रयोग करना हानिकारक है !

संसार में ऐसे लोग भी है जो कभी भी किसी भ्रम में नहीं पड़ते और ना ही किसी प्रकार के प्रयोग अथवा मंत्र का सहारा लेते है फिर भी उनके जीवन में सांसारिक समस्याएं आने पर तुरंत अपनेआप समाधान हो जाता है | ऐसा भी कहा जा सकता है कि उन लोगों के पिछले कर्म बहुत अच्छे होंगे तभी ऐसा होता है परन्तु पिछले कर्मों के साथ-साथ वर्तमान कर्म भी कर्मफल को प्रभावित करता है |

सभी लोग अपनी दिनचर्या में कुछ ऐसे कार्य भी करते है जो उनकी समस्याओं और परिस्थिति में लाभ या हानि भी करते है | यह करने वाले व्यक्ति को भी पता नहीं होता कि उसे किसी विशेष प्रकार के वर्तमान कार्य के सकारात्मक फल मिलने से उसका जीवन सुगम चल रहा है या उसके किसी विशेष कार्य के नकारात्मक फल मिलने से जीवन में अधिक संघर्ष हो रहा है |

अब प्रश्न यह है कि ऐसे कौन से कार्य हैं जो प्रतिदिन किए जा सकते है जो सभी प्रकार की नकारात्मकता से बचाने के साथ-साथ भयमुक्त और भ्रममुक्त जीवन जीने में सहायक होते है और ऐसे कौन से प्रयोग होते हैं जिनको जानबूझ करने से समस्याएं समाप्त नहीं होती उलटा बढ जाती है |

इलेक्ट्रॉनिक के इस युग में स्वयं को अधिक ज्ञानी साबित करने के लिए तरह-तरह के प्रयोग बताने वालों के होड़ लगी हुई है परन्तु अधिकतर लोग समस्या का उपाय नहीं, बल्कि उसके लिए प्रयोग बताते है, अब किस प्रयोग का क्या फल मिलेगा यह बताने वाले को भी नहीं पता होता क्योंकि इनमे अधिकतर प्रयोग तर्कहीन होते है |

नए-नए प्रयोग बताने में उनका निजी लाभ यह है कि समस्या से ग्रसित लोग यह समझेंगे कि इस व्यक्ति के पास ज्ञान का भण्डार है इसलिए यह इतने अधिक प्रयोग बता रहा है | तर्क की अज्ञानता में प्रयोग बताने वाले व्यक्ति उन प्रयोगों के नकारात्मक प्रभाव के जवाबदेह नहीं होते क्योंकि उन्होंने किसी समस्या के लिए उपाय नहीं, केवल प्रयोग बताया है |

अपनी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए लोग इधर-उधर इसीलिए भी भटकते रहते है क्योंकि वे उपायों के स्थान पर प्रयोगों को करने में समय, धन और ऊर्जा को नष्ट करते है | इस बात को एक बार अवश्य सोचें कि पहले समय में इतने सारे प्रयोगों के बिना भी जीवन बहुत सुखी और आनंदित था | उपायों की गिनती कम है जबकि संकटमय प्रयोग अनगिनत हैं |

जीवन को सरल बनाने के लिए अधिक प्रयोगों के आवश्यकता नहीं है बल्कि ऐसे उपाय की आवश्यकता है जो बिना किसी हानि के समस्या को जड़ से समाप्त करे और परिस्थितियाँ अनुकूल करे | आवश्यकता से अधिक प्रयोगों का करना समस्या को अधिक गंभीर करना है इसलिए कभी भी तर्कहीन या सुने सुनाए प्रयोग ना करें |

कुछ समस्याएं ऐसी होती है जिनको  लोग नहीं समझ सकते क्योंकि यह अदृश्य संसार से सम्बंधित होती है | कुदृष्टि, जादू-टोना, प्रेतात्मा इत्यादि के लक्षण तो सभी लोगों को पता होते है परन्तु इनके लिए सटीक उपाय का ज्ञान सभी को नहीं है और इन समस्यायों के लिए तर्कहीन या सुनेसुनाये प्रयोग करना प्रेतात्माओं को अधिक बल देना है |

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उपायों का फल क्यों नहीं मिलता !

संसार का प्रत्येक व्यक्ति अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनेकों उपाय करता है परन्तु इनमे अधिकतर उपायों का कोई फल नहीं मिलता जिसके कारण किसी एक समस्या के लिए व्यक्ति बार-बार उपाय करता रहता है | कहा जाता है कि संसार में विश्वास से किया गया कोई भी कर्म निष्फल नहीं जाता, यदि ऐसा है तो फिर उपायों का फल क्यों नहीं मिलता क्योंकि हर उपाय पूरे विश्वास और श्रद्धा से किया जाता है |

अपना मन समझाने के लिए व्यक्ति स्वयं को अनेकों तर्क देता है जैसे इसी में कुछ भलाई होगी, ईश्वर को यही मंज़ूर होगा, अभी समय नहीं आया, इत्यादि | अपने मन को बहलाने से समस्या का समाधान नहीं होता, किसी इच्छित कार्य का पूरा होना समस्या का समाधान है | आइये इसे विस्तार से समझते है कि उपायों का फल क्यों नहीं मिलता |

किसी उपाय का लाभ होना या नहीं होना इस बात पर भी निर्भर करता है कि उपाय बताने वाले व्यक्ति को उपायों का कितना ज्ञान है | यदि उसके उपायों का आधार अपने जीवन काल में सुनी-सुनाई बातें या सस्ती पुस्तकीय जानकारी है तो ऐसे अधिकतर उपायों का लाभ नहीं मिलता है | उपाय का लाभ तभी मिलता है जब व्यक्ति को समस्या का कारण और उपाय के तर्क एवं वास्तविकता का ज्ञान हो |

यदि उपाय का तार्किक ज्ञान हो तो बड़ी से बड़ी समस्या के लिए छोटा सा उपाय भी काफी है | पूर्ण तार्किक ज्ञान होने के लिए किसी गुरु द्वारा दिव्यज्ञान मिलना या अपना निजी शोध होना अति आवश्यक है | हर व्यक्ति अपने आप को गुरु कहलाने के लिए अधिक से अधिक उपायों को तोड़-मरोड़ कर बताते है जिसके परिणाम से साधारण व्यक्ति के कार्य पूरे नहीं होने के साथ-साथ धन और समय हानि भी होती है |

      मेरे पास ऐसे अनेकों लोग आते है जिन्होंने अनेकों उपायों को श्रद्धा और विश्वास से किया परन्तु उनकी समस्याएं जस की तस रही | उपायों का फल नहीं मिलने पर अनेकों लोग उपायों और ईश्वर पर विश्वास करना बंद कर देते है | उपायों के सम्पूर्ण ज्ञान नहीं होने पर भी लोग दूसरों को अधिक से अधिक उपाय बता देते है जबकि ऐसे उपायों को करने से अधिकतर लोगो को केवल हानि ही होती है |

यदि आपको कोई भी व्यक्ति ऐसा उपाय बताता है जिसके तर्क का ज्ञान उसे नहीं है या वह व्यक्ति यह नहीं बता सके कि उपाय सकारात्मक परिणाम कैसे देगा तो ऐसे उपायों को बिलकुल भी नहीं करे, नहीं तो समस्या समाप्त होने के स्थान पर आपकी समस्या बढ़ सकती है | पिछले कई सालों में मैंने अनेकों शिष्यों को उपायों का तर्कज्ञान को सिखाया है जो मेरे निजी-शोध(Self Reserch) का सार है | भारत और विदेशों में रहने वाले हजारों लोगो को उपायों के तर्कज्ञान होने से उनका धन और समय की हानि होने से बचाव भी हुआ है |

आपको कौन सा उपाय करना चाहिए और कौन सा उपाय नहीं करना चाहिए इसकी सम्पूर्ण जानकारी के लिए संपर्क करे !

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पृथ्वी का उपाय !

जीव का जन्म पृथ्वी पर होता है, पृथ्वी पर ही वह कर्म करता है और यहीं पर ही वह कर्म भोगता है, पृथ्वी पर ही जीव की मृत्यु होती है, कर्मों के आधार पर मृत्यु के बाद प्रेतयोनी पृथ्वी पर मिलती है और फिर अगला जन्म होना या मोक्ष मिलना भी पृथ्वी पर ही होता है | यदि सभी कुछ पृथ्वी पर ही होता है तो कोई भी व्यक्ति पृथ्वी ग्रह का उपाय क्यों नहीं करता !

यदि पृथ्वी का उपाय किया जाए तो पृथ्वी पर होने वाली समस्याओं का समाधान भी अपनेआप हो जायेगा | पृथ्वी पर सकारात्मक और नकारात्मक, दो प्रकार की ऊर्जाएं है और पृथ्वी पर उपस्थित सभी जीवों का शरीर पंच तत्वों से बना हुआ है इसलिए पृथ्वी ग्रह की नकारात्मक ऊर्जा पंचतत्वों से बने शरीर के तत्व संतुलन को बिगाड़ देती है जिससे जीव को अनिच्छित समस्याओं का सामना करना पड़ता है |

          पृथ्वी का उपाय करने में तत्वों का प्रयोग अनिवार्य है क्योंकि तत्वों के मिश्रण से शरीर का निर्माण पृथ्वी पर होता है | तत्व उपाय इसलिए भी अधिक कारगर होगा क्योंकि पृथ्वी पर होने वाली समस्या शरीर के पंचतत्व संतुलन बिगड़ने से हुआ है और इसका उपाय जीव द्वारा पृथ्वी पर रहते हुए ही होगा |

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उपाय भी सिद्ध होते है !

व्यक्ति अपनी समस्याओं से छुटकारा पाने और जीवन सरल करने के लिए तरह तरह के उपाय करता है | व्यक्ति समय समय पर उपाय बताने वाले लोगों से अपनी समस्या या परिस्थिति के लिए उपाय पूछकर बड़ी श्रद्धा और विश्वास से करता है परन्तु अधिकतर उपाय काम नहीं करते या फिर बहुत अधिक उपाय करने और बड़ी धनराशी खर्चकरने के बाद समस्या में थोडा सुधार देखने को मिलता है | ऐसे में व्यक्ति के मन में शंका होने लगती है कि उपाय करने से कुछ होता भी है या नहीं, क्योंकि अधिकतर लोगों को उपाय करने के बाद केवल निराशा ही मिलती है|

यदि उपाय करने से व्यक्ति को कोई लाभ ना होता तो उपाय बताने का कार्य भी नहीं होता, इसका अर्थ है उपाय करने से लाभ अवश्य मिलता है | हर उपाय के पीछे एक तर्क या वैज्ञानिक कारण होता है यदि उपाय बताने वाले आने वाले व्यक्ति की समस्या को समाप्त करने के तर्क का ज्ञान हो तभी उपाय का फल जल्दी मिलता है | इन्टरनेट के इस युग में अधिकतर लोगों को अधिकतर उपायों का ज्ञान है, जो करने से उनको लाभ नहीं होता जिसका मुख्य कारण यह है कि उपाय बताने वाला हर व्यक्ति अपनी बात को दूसरों से बड़ी और सच्ची बताने के लिए उपायों को तोड़ मरोड़ रहे है जिसके कारण उपाय का मुख्य तर्क समाप्त हो जाता है और उपाय करने से लाभ होने के बजाय हानि भी हो जाती है |

संसार में जन्म लेकर हर व्यक्ति का एक निश्चित कार्य होता है और हर व्यक्ति की अपनी कर्मपूँजी होती है जिसको वह अपना कार्य करके खर्च करता है | पहले समय में एक संत या एक ज्ञानी होता था जो सबको पढने के लिए एक ही मंत्र देते थे, ऐसा नहीं होता था कि हर समस्या के लिए अलग मंत्र होता था, सभी लोगों के लिए एक ही वस्तु प्रयोग के लिए देते थे, चाहे वह पीने के लिए जल हो, खाने के लिए प्रसाद हो, फिर भी सभी समस्यायों के लिए एक उपाय काफी होता था परन्तु आज एक समस्या के लिए बहुत सारे उपाय भी असफल होते है |

पहले समय के पीर-फ़कीर और संत-ज्ञानी लोग कोई भी उपाय बताने से पहले कठिन साधना करके कर्मपूँजी एकत्रित करते थे जिससे उनके द्वारा बताया गया कोई भी उपाय, मंत्र या विधि समस्या को जड़ से समाप्त कर देती थी और भविष्य में भी सुरक्षा बनी रहती थी | कई बार उन्हें यह उपाय अपने गुरु से कृपा या आशीर्वाद के रूप में मिला होता था जिसको बताकर वह लोगों के कष्टों का निवारण करते थे | कर्मपूँजी के बिना किसी को उपाय बताने को पुण्य समझकर प्रसन्न होने वाले व्यक्ति यह नहीं सोचते कि यदि किसी स्थान पर आग लगी हो तो उसको बुझाने वाले व्यक्ति पर  उस आग की गर्मी के प्रभाव अवश्य होता है, आग के प्रभाव से पूर्णत: बचने के लिए कर्मपूँजी या गुरु आशीर्वाद होना अति आवश्यक है |

किसी एक उपाय से सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान हो जाना इस बात का प्रमाण है कि उपाय बताने वाले व्यक्ति ने उपाय को सिद्ध किया हुआ है या उसे वह उपाय उसे अपने गुरु के आशीर्वाद के रूप में मिला हुआ है जिसको करने से आने वाले व्यक्ति की समस्या का समाधान हो जाता है और बताने वाले व्यक्ति पर कोई नकारात्मक प्रभाव भी नहीं पड़ता | उपाय बताने वाले व्यक्ति को अपनी कर्मपूँजी पर अधिक ध्यान देना चाहिए, कहीं ऐसा ना हो कि आमदनी से अधिक खर्च हो रहा हो और उपाय बताने के बदले दूसरों की समस्याओं के अंश का प्रभाव स्वयं पर आ रहा हो | उपाय बताना सभी का कार्य नहीं है, उपाय तभी बताना चाहिए जब उपाय के तर्क का ज्ञान हो और उपाय बताने से पहले उस उपाय को सिद्ध किया होना आवश्यक है या किसी गुरु से आशीर्वाद के रूप में मिलना आवश्यक है |

किसी को उपाय बताकर स्वयं पर नकारात्मक प्रभाव आने के पीछे तर्क यह है कि एक व्यक्ति के भाग्य में कर्मफल भोगना लिखा है और दूसरा व्यक्ति उसका उपाय बताकर उस कर्मफल को समाप्त करता है | कर्म का स्वभाव है फल देना, जिसे हम कर्मफल कहते है, यदि कोई व्यक्ति उपाय बताकर कर्मफल भोगने वाले व्यक्ति को बचाता है तो यह इस प्रकार हुआ जैसे किसी की जमानत देना | यदि व्यक्ति द्वारा उपाय को तर्क से नहीं किया जाता है कर्म का फल उपाय बताने वाले व्यक्ति को भुगतना पड़ेगा | जीवन में ऐसी बहुत सी समस्याएं आती है जो दूसरों के कर्म का फल होती है, प्राय: लोग यह कहते भी है कि हमने इस जन्म में ऐसा कोई कार्य नहीं किया जिसकी इतनी बड़ी सजा हो | किसी को उपाय बताने से पहले,  उपाय बताकर मिलने वाले नकारात्मक प्रभाव को समाप्त करने के लिए उस उपाय को सिद्ध करना चाहिए  |

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पृथ्वी पर चारों ओर नकारात्मक शक्तियां हैं इसलिए पुस्तकीय उपाय या सुने सुनाये टोटके करना उचित नहीं है, बहुत से लोग इन्टरनेट से पढ़कर या टेलीविज़न पर देखकर उपायों को करना शुरू कर देते है जो कभी भी लाभदायक नहीं है ऐसा करना हानिकारक होता है | यह ज्ञान भी सभी लोगों को नहीं है कि हर युग में समस्या और आवश्यकता बदलती रहती है जिसके अनुसार विधियों और उपायों में बदलाव होता रहता है इसलिए पुराने समय की समस्या के लिए हो चुका उपाय, आज की समस्या के लिए पूर्णत: कारगर नहीं है | नकारात्मक शक्ति का सही उपचार करने के लिए अधिक उपाय करने से बड़ी गलती होने के संभावना भी अधिक है इसलिए उपायों की अधिकता की नहीं बल्कि सटीकता की आवश्यकता है |

 

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Napoo तत्व चिकित्सा

सभी जानते है कि शरीर पंचतत्वों (अग्नि, वायु, जल, पृथ्वी और आकाश) से बना है | जब हमारे शरीर के तत्व असंतुलित होते हैं तब हमें मानसिक, शारीरिक और सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है । इन तत्वों का संतुलन बिगड़ने में दूसरों की नकारात्मक ऊर्जा का हमारे जीवन से बहुत गहरा सम्बन्ध है क्योंकि हमारे जीवन में उत्पन्न होने वाली अधिकतर समस्याएं दूसरों के कारण ही होती है |

दूसरों के विचार और कर्म, हमारे शरीर के पंचतत्वों को प्रभावित करके जीवन को गुप्त रूप से हानि करते है | यहां तक कि आकाश में स्थित ग्रह भी अपनी सूक्ष्मकिरणों द्वारा शरीर के सभी तत्वों को निरंतर असंतुलित करते रहते है जिससे प्रतिदिन नई समस्या उत्पन्न होती है | इसी प्रकार पृथ्वी ग्रह और पृथ्वी पर स्थित सभी जीवों और वस्तुओं द्वारा शरीर के तत्व असंतुलित होते है |

शरीर के सभी पांच तत्वों को संतुलित करने के लक्ष्य से Napoo Foundation ने कई वर्षों के गहन शोध के बाद वर्ष 2004 में Napoo तत्व चिकित्सा आरम्भ की थी और इससे देश विदेश में लोगों को लाभ भी हुआ है | इस चिकित्सा से नवग्रहों का बुरा प्रभाव, पृथ्वी पर दूसरों की नकारात्मक ऊर्जा तथा दुष्ट शक्तियाँ अपने आप समाप्त हो जाती है | Napoo चिकित्सा में सभी प्रकार की समस्याओं और दुखों के लिए तत्वों का प्रयोग होता है |

Napoo तत्व चिकित्सा पद्धति से शरीर के सभी तत्वों को संतुलित कर लिया जाता है जिससे हर   प्रकार की समस्या (मानसिक, शारीरिक और सामाजिक) अपनेआप ही समाप्त हो जाती है | Napoo तत्व चिकित्सा सीखने के बाद इसका प्रयोग आप स्वयं कर सकते है | Napoo तत्व चिकित्सा पद्धति ही सुनिश्चित करती है कि कौन सी समस्या के लिए किस तत्व का (कितना और कैसे) प्रयोग करना चाहिए |

Napoo तत्व चिकित्सा और Napoo तत्व शिक्षा के लिए संपर्क करें |

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Napoo Foundation

संस्थापक : विजय बतरा Karmalogist

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Napoo Foundation, New Delhi, INDIA

Founder :- Vijay Batra Karmalogist

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