Napoo healing | Paranormal Expert

Black Magic Specialist | Paranormal healing Expert, Vijay Batra

Hindi

Napoo Healing Course

Napoo Foundation की स्थापना करने वाले श्री विजय बतरा Karmalogist कहते हैं कि हमारा शरीर पंचतत्वों से बना है इसलिए जब किसी व्यक्ति पर नकारात्मकता का प्रभाव होता है या उसे कोई नकारात्मक शक्ति हानि करती है तब उसके शरीर के तत्व असंतुलित हो जाते हैं जो मानसिक, शारीरिक और अन्य सांसारिक समस्याओं का कारण बनते है । दूसरों की नकारात्मक ऊर्जा का हमारे जीवन से बहुत गहरा सम्बन्ध है क्योंकि हमारे जीवन में उत्पन्न होने वाली अधिकतर समस्याएं दूसरों के कारण ही होती है | दूसरों के विचार, दूसरों की गति और दूसरों का स्वभाव, शरीर के सभी तत्वों को प्रभावित करके जीवन को गुप्त रूप से संचालित करता है |

यहाँ तक कि आकाशगंगा में स्थित ग्रह (सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध,बृहस्पति, शुक्र और शनि) भी अपने स्वभाव और गति के अनुसार अपनी सूक्ष्मकिरणों द्वारा पृथ्वी पर उपस्थित सभी जीवों के शारीरिक तत्वों को निरंतर प्रभावित करते रहते है जिसके कारण हर व्यक्ति को प्रतिदिन नई समस्या का सामना करना पड़ता है | इसके अतिरिक्त पृथ्वी ग्रह पर उपस्थित सभी जीवों और वस्तुओं द्वारा भी हमारे शारीरिक तत्व असंतुलित होते रहते है |

शरीर के सभी तत्वों को संतुलित करने के लक्ष्य से Napoo Foundation ने वर्ष 2004 में तत्व आधारित Napoo healing विकसित की है इस तत्व आधारित उपचार पद्धति से ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव और दूसरों द्वारा होने वाली हानि से छुटकारा मिलता है | Napoo तात्विक हीलिंग ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव से बचाव के अतिरिक्त और बुरी नज़र(Evil eye), टोना-टोटका(Black Magic), मंत्रघात(Spells) श्राप(Curse) प्रेतात्मा(Spirit) आदि सम्बंधित समस्याओं में अति कारगर है | Napoo हीलिंग का किसी धर्म से कोई सम्बन्ध नहीं है यह किसी भी व्यक्ति को उसके धार्मिक या आध्यात्मिक विश्वासों को बदलने के लिए नहीं कहता है और यह healing अन्य सभी प्रकार की healings और अनुष्ठानों से बिलकुल अलग है |

Napoo Foundation, New Delhi, India ने कई सालों तक तत्व विज्ञान की खोज करके समस्याओं के आधार पर तत्व उपचार पद्धति विकसित की है जो यह सुनिश्चित करती है कि कौन सी समस्या के लिए किस तत्व का (कितना और कैसे) प्रयोग करना चाहिए | Napoo विश्व भर में एकमात्र ऐसी पद्धति है जिसमे समस्याओं का समाधान तत्व उपचार से किया जाता है |  Napoo healing पद्धति के पीछे मूल अवधारणा यह है कि शरीर के सभी तत्व संतुलित करने से आंतरिक और बाहरी नकारात्मकता प्रभाव नहीं करती है जिससे जीवन में समस्याएं उप्तन्न नहीं होती है Napoo अपने अद्वितीय परिणामों के कारण विश्व भर में बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है |

Napoo healing द्वारा विशेष जानकारियाँ :

उपायों का भी नकारात्मक प्रभाव होता है !

कई सज्जन और देवियाँ लोगो की समस्याओं का समाधान उपाय बताकर या स्वयं किसी विधि या जाप इत्यादि से करते है मार्गदर्शक का कार्य करने वाले लोगों को उपाय बताने के बदले गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है | इनमे मुख्य समस्या उनका स्वास्थ्य या पारिवारिक सुख की कमी है |उपाय बताकर समस्या आने का मुख्य कारण यह है कि मार्गदर्शक व्यक्ति जिस भी ग्रह या देव का उपाय बताता है वह स्वयं उस ग्रह या देव के लिए कोई उपाय नहीं करता, कभी कभी तो मार्गदर्शक जिस ग्रह या देव के उपाय बताता है उनमे उसकी स्वयं की आस्था ही नहीं होती |

मार्गदर्शक उपाय बताकर बाधा समाप्त करने का यत्न करता है और यह समझता है कि ऐसा करना मेरा व्यवसाय है और जातक की समस्या दूर होने पर मुझे पुण्यकर्म के रूप में भी लाभ मिलेगा | यदि ऐसा होता तो उपाय बताने या किसी बाधा पर कार्य करने वालों को तो कभी कोई समस्या ही नहीं होती क्योंकि उनके पुण्यकर्म तो दिन प्रतिदिन बढ़ रहे है | हम सभी जानते है कि संसार कर्मों के लेनदेन से चलता है जब तक लेनदेन समाप्त नहीं होता तब तक आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती | मार्गदर्शक जिस भी ग्रह या देव का उपाय बताता है वह ग्रह या देव उस ग्रसित व्यक्ति को तभी छोड़ेंगे जब उनका हिसाब मार्गदर्शक स्वयं दे |

ऐसा भी कहा जाता है कि ग्रह या देव पूजा अर्चना से प्रसन्न होते है साथ ही यह भी कहा जाता है कि स्वार्थ में की गयी पूजा अर्चना का कोई लाभ नहीं होता, ऐसी पूजा अर्चना करने से तो नहीं करना अच्छा है| ग्रह या देव मार्गदर्शक के संबंधी नहीं हैं ना ही उसके सेवक है कि उसके बताये उपाय को करने से व्यक्ति की बाधा/समस्या भी दूर हो जाये और कर्मफल समाप्त भी हो जाये | कर्मफल को समाप्त करने के लिए समस्या ग्रसित व्यक्ति के साथ साथ मार्गदर्शक अपनी ऊर्जा को कर्मफल समाप्त करने में लगाये तो ही वह उपायों के नकारात्मक प्रभाव से बच सकता है, अधिकतर मार्गदर्शक ऐसा नहीं करते |

यहाँ तक कि एक बड़ी संख्या को तो यह भी नहीं मानती क्योंकि उन्हें इस बात का ज्ञान ही नहीं है कि उन पर उपाय बताने से कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ता है जबकि किसी का कार्य पूरा होने पर पुण्यकर्म समझते है | यदि किसी का सही मार्गदर्शन करने से सकारात्मक प्रभाव है तो कर्मफल मिलने में बाधा बनने पर नकारात्मक प्रभाव भी है |

यदि किसी का सही मार्गदर्शन करने से सकारात्मक प्रभाव है तो कर्मफल मिलने में बाधा बनने पर नकारात्मक प्रभाव भी है | आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो हर कर्म का एक फल होता है और वह फल तब तक समाप्त नहीं होता जब तक उसको पूरा भोगा नहीं जाये | जब कोई व्यक्ति मार्गदर्शक द्वारा बताई गयी विधि, उपाय, दान, पूजा इत्यादि को श्रद्धा से करता है तो उसकी बाधा/समस्या का प्रभाव मार्गदर्शक पर पड़ता है, क्योंकि मार्गदर्शक ने उस व्यक्ति और बाधा की मध्यस्था की है इसलिए उसे भी बाधा का एक भाग अवश्य भोगना पडता है व्यक्ति का बिना भोगा कर्मफल मार्गदर्शक के हिस्से में आता है जिसके प्रभाव से मार्गदर्शक के जीवन में ऐसी समस्याएं भी आती है जो उसके भाग्य की नहीं होती | 

किसी भी समस्या के लिए प्रयोग करना हानिकारक है !

संसार में ऐसे लोग भी है जो कभी भी किसी भ्रम में नहीं पड़ते और ना ही किसी प्रकार के प्रयोग अथवा मंत्र का सहारा लेते है फिर भी उनके जीवन में सांसारिक समस्याएं आने पर तुरंत अपनेआप समाधान हो जाता है | ऐसा भी कहा जा सकता है कि उन लोगों के पिछले कर्म बहुत अच्छे होंगे तभी ऐसा होता है परन्तु पिछले कर्मों के साथ-साथ वर्तमान कर्म भी कर्मफल को प्रभावित करता है |

सभी लोग अपनी दिनचर्या में कुछ ऐसे कार्य भी करते है जो उनकी समस्याओं और परिस्थिति में लाभ या हानि भी करते है | यह करने वाले व्यक्ति को भी पता नहीं होता कि उसे किसी विशेष प्रकार के वर्तमान कार्य के सकारात्मक फल मिलने से उसका जीवन सुगम चल रहा है या उसके किसी विशेष कार्य के नकारात्मक फल मिलने से जीवन में अधिक संघर्ष हो रहा है |

अब प्रश्न यह है कि ऐसे कौन से कार्य हैं जो प्रतिदिन किए जा सकते है जो सभी प्रकार की नकारात्मकता से बचाने के साथ-साथ भयमुक्त और भ्रममुक्त जीवन जीने में सहायक होते है और ऐसे कौन से प्रयोग होते हैं जिनको जानबूझ करने से समस्याएं समाप्त नहीं होती उलटा बढ जाती है |

इलेक्ट्रॉनिक के इस युग में स्वयं को अधिक ज्ञानी साबित करने के लिए तरह-तरह के प्रयोग बताने वालों के होड़ लगी हुई है परन्तु अधिकतर लोग समस्या का उपाय नहीं, बल्कि उसके लिए प्रयोग बताते है, अब किस प्रयोग का क्या फल मिलेगा यह बताने वाले को भी नहीं पता होता क्योंकि इनमे अधिकतर प्रयोग तर्कहीन होते है अपनी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए लोग इधर-उधर इसीलिए भी भटकते रहते है क्योंकि वे उपायों के स्थान पर प्रयोगों को करने में समय, धन और ऊर्जा को नष्ट करते है | इस बात को एक बार अवश्य सोचें कि पहले समय में इतने सारे प्रयोगों के बिना भी जीवन बहुत सुखी और आनंदित था | उपायों की गिनती कम है जबकि संकटमय प्रयोग अनगिनत हैं |

जीवन को सरल बनाने के लिए अधिक प्रयोगों के आवश्यकता नहीं है बल्कि ऐसे उपाय की आवश्यकता है जो बिना किसी हानि के समस्या को जड़ से समाप्त करे और परिस्थितियाँ अनुकूल करे | आवश्यकता से अधिक प्रयोगों का करना समस्या को अधिक गंभीर करना है इसलिए कभी भी तर्कहीन या सुने सुनाए प्रयोग ना करें |

कुछ समस्याएं ऐसी होती है जिनको  लोग नहीं समझ सकते क्योंकि यह अदृश्य संसार से सम्बंधित होती है | कुदृष्टि, जादू-टोना, प्रेतात्मा इत्यादि के लक्षण तो सभी लोगों को पता होते है परन्तु इनके लिए सटीक उपाय का ज्ञान सभी को नहीं है और इन समस्यायों के लिए तर्कहीन या सुनेसुनाये प्रयोग करना प्रेतात्माओं को अधिक बल देना है |

अनेकों उपाय करके भी इच्छित फल क्यों नहीं मिलता है !

संसार का प्रत्येक व्यक्ति अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनेकों उपाय करता है परन्तु इनमे अधिकतर उपायों का कोई फल नहीं मिलता जिसके कारण किसी एक समस्या के लिए व्यक्ति बार-बार उपाय करता रहता है | कहा जाता है कि संसार में विश्वास से किया गया कोई भी कर्म निष्फल नहीं जाता, यदि ऐसा है तो फिर उपायों का फल क्यों नहीं मिलता क्योंकि हर उपाय पूरे विश्वास और श्रद्धा से किया जाता है |

अपना मन समझाने के लिए व्यक्ति स्वयं को अनेकों तर्क देता है जैसे इसी में कुछ भलाई होगी, ईश्वर को यही मंज़ूर होगा, अभी समय नहीं आया, इत्यादि | अपने मन को बहलाने से समस्या का समाधान नहीं होता, किसी इच्छित कार्य का पूरा होना समस्या का समाधान है | आइये इसे विस्तार से समझते है कि उपायों का फल क्यों नहीं मिलता |

किसी उपाय का लाभ होना या नहीं होना इस बात पर भी निर्भर करता है कि उपाय बताने वाले व्यक्ति को उपायों का कितना ज्ञान है | यदि उसके उपायों का आधार अपने जीवन काल में सुनी-सुनाई बातें या सस्ती पुस्तकीय जानकारी है तो ऐसे अधिकतर उपायों का लाभ नहीं मिलता है | उपाय का लाभ तभी मिलता है जब व्यक्ति को समस्या का कारण और उपाय के तर्क एवं वास्तविकता का ज्ञान हो |

यदि उपाय का तार्किक ज्ञान हो तो बड़ी से बड़ी समस्या के लिए छोटा सा उपाय भी काफी है | पूर्ण तार्किक ज्ञान होने के लिए किसी गुरु द्वारा दिव्यज्ञान मिलना या अपना निजी शोध होना अति आवश्यक है | हर व्यक्ति अपने आप को गुरु कहलाने के लिए अधिक से अधिक उपायों को तोड़-मरोड़ कर बताते है जिसके परिणाम से साधारण व्यक्ति के कार्य पूरे नहीं होने के साथ-साथ धन और समय हानि भी होती है |

अनेकों लोग जिन्होंने उपायों को श्रद्धा और विश्वास से करते है परन्तु उनकी समस्याएं जस की तस बनी रहती है | उपायों का फल नहीं मिलने पर अनेकों लोग उपायों और ईश्वर पर विश्वास करना बंद कर देते है | उपायों के सम्पूर्ण ज्ञान नहीं होने पर भी लोग दूसरों को अधिक से अधिक उपाय बता देते है जबकि ऐसे उपायों को करने से अधिकतर लोगो को केवल हानि ही होती है |

यदि आपको कोई भी व्यक्ति ऐसा उपाय बताता है जिसके तर्क का ज्ञान उसे नहीं है या वह व्यक्ति यह नहीं बता सके कि उपाय सकारात्मक परिणाम कैसे देगा तो ऐसे उपायों को बिलकुल भी नहीं करे, नहीं तो समस्या समाप्त होने के स्थान पर आपकी समस्या बढ़ सकती है आपको किस समस्या के लिए कौन सा उपाय करना चाहिए और कौन सा उपाय नहीं करना चाहिए इसकी सम्पूर्ण जानकारी के लिए भी संपर्क करे |

Contact for Napoo Healing Course

Website: www.napoohealing.com

Napoo foundation

Paschim Vihar, New Delhi – 110063

INDIA

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