Napoo Healing

Alternative Therapy for paranormal Problems

Hindi

Napoo Healing 

College of Spiritual Education और Napoo Foundation की स्थापना करने वाले श्री विजय बतरा ‘Karmalogist’ कहते हैं कि हमारा शरीर पंचतत्वों (अग्नि, वायु, जल, पृथ्वी और आकाश) से बना है इसलिए जब किसी व्यक्ति पर नकारात्मकता का प्रभाव होता है या उसे कोई नकारात्मक शक्ति हानि करती है तब उसके शरीर के तत्व असंतुलित हो जाते हैं जो मानसिक, शारीरिक और अन्य सांसारिक समस्याओं का कारण बनते है ।

दूसरों की नकारात्मक ऊर्जा का हमारे जीवन से बहुत गहरा सम्बन्ध है क्योंकि हमारे जीवन में उत्पन्न होने वाली अधिकतर समस्याएं दूसरों के कारण ही होती है | दूसरों के विचार, दूसरों की गति और दूसरों का स्वभाव, शरीर के सभी तत्वों को प्रभावित करके जीवन को गुप्त रूप से संचालित करता है |

यहाँ तक कि आकाशगंगा में स्थित ग्रह (सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध,बृहस्पति, शुक्र और शनि) भी अपने स्वभाव और गति के अनुसार अपनी सूक्ष्मकिरणों द्वारा पृथ्वी पर उपस्थित सभी जीवों के शारीरिक तत्वों को निरंतर प्रभावित करते रहते है जिसके कारण हर व्यक्ति को प्रतिदिन नई समस्या का सामना करना पड़ता है | इसके अतिरिक्त पृथ्वी ग्रह पर उपस्थित सभी जीवों और वस्तुओं द्वारा भी हमारे शारीरिक तत्व असंतुलित होते रहते है |

शरीर के सभी तत्वों को संतुलित करने के लक्ष्य से श्री बतरा जी ने वर्ष 2004 में तत्व आधारित Napoo healing विकसित की है इस तत्व आधारित उपचार पद्धति से ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव और दूसरों द्वारा होने वाली हानि से छुटकारा मिलता है | Napoo तात्विक हीलिंग ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव से बचाव के अतिरिक्त और बुरी नज़र(Evil eye), टोना-टोटका(Black Magic), मंत्रघात(Spells) श्राप(Curse) प्रेतात्मा(Spirit) आदि सम्बंधित समस्याओं में अति कारगर है | Napoo हीलिंग का किसी धर्म से कोई सम्बन्ध नहीं है यह किसी भी व्यक्ति को उसके धार्मिक या आध्यात्मिक विश्वासों को बदलने के लिए नहीं कहता है और यह healing अन्य सभी प्रकार की healings और अनुष्ठानों से बिलकुल अलग है |

श्री विजय बतरा जी ने कई सालों तक तत्व विज्ञान की खोज करके समस्याओं के आधार पर तत्व उपचार पद्धति विकसित की है जो यह सुनिश्चित करती है कि कौन सी समस्या के लिए किस तत्व का (कितना और कैसे) प्रयोग करना चाहिए | Napoo विश्व भर में एकमात्र ऐसी पद्धति है जिसमे समस्याओं का समाधान तत्व उपचार से किया जाता है |

विजय बतरा Karmalogist द्वारा विकसित तत्व आधारित Napoo healing पद्धति के पीछे मूल अवधारणा यह है कि शरीर के सभी तत्व संतुलित करने से आंतरिक और बाहरी नकारात्मकता प्रभाव नहीं करती है जिससे जीवन में समस्याएं उप्तन्न नहीं होती है Napoo अपने अद्वितीय परिणामों के कारण विश्व भर में बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है |

नापू तत्व उपचार के कुछ नियम हैं जैसे :

हाथ में अंगूठी, गले में किसी धागे या ताबीज का प्रयोग करना वर्जित है |

Napoo उपायों को करते समय सभी प्रकार के अन्य उपाय करना वर्जित है |

Napoo द्वारा सम्पूर्ण सुरक्षा के लिए कोई भी यंत्र रखना वर्जित है |

Napoo उपायों से साथ अन्य मंत्र उच्चारण या अन्य उपाय करना वर्जित है |

 

इन नियमों का पालन करने के पीछे रहस्यमयी गुप्त कारण है |

नापू में यंत्रों का प्रयोग इसलिए मना है क्योंकि यंत्रों से नकारात्मक ऊर्जा निकलती है !

आइये इसे विस्तार से समझते है:

यंत्र का उपयोग किसी विशेष कार्य को पूर्ण होने या इच्छा की सिद्धि के लिए किया जाता है | सभी प्रकार के यंत्रों पर इच्छित कार्य के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रकार के आकार बने होते है जिनकी अपनी ऊर्जा शक्ति होती है | यंत्रों पर भिन्न-भिन्न अक्षर या अक्षरों से शब्द अथवा वाक्य होते है, सभी अक्षरों का अपना-अपना वास्तविक ध्वनी कम्पन होता है | ध्वनी कम्पन से विशेष तरंगें निकलती है जो किसी इच्छा सिद्धि के लिए बहुत अधिक सहायक होती है |

          यंत्रों में धातु और रंगों का भी प्रयोग होता है, प्रत्येक धातु का अपना बल प्रभाव होता है इसी प्रकार सभी रंगों का भी अपना सांसारिक महत्त्व है | किसी यंत्र के निर्माण के लिए आकर, रेखाचित्र, अक्षर, धातु और रंग आवश्यक होते है | बिंदु, रेखा, त्रिकोण, चतुर्भुज, पंचभुज, षष्टकोण, सप्तकोण, अष्टकोण, घेरा इत्यादि का आपस में समानता नहीं है इसलिए इनका प्रभाव भी सामान नहीं है | इसी प्रकार सभी अक्षरों का ध्वनी कम्पन भी एक दूसरे से भिन्न है | यंत्रों का अधिकतम प्रयोग धन के लिए, बीमारी से छुटकारा पाने के लिए, अकारण परेशानियों से मुक्ति के लिए और नकारात्मक शक्तियों से बचने के लिए किया जाता है | कुछ लोग यंत्रों को गले या अंगूठी में भी धारण कर लेते है |

सकारात्मक फल की इच्छा से रखे गए यंत्र का नकारात्मक प्रभाव इसलिए भी होता है क्योंकि प्रकृति का नियम है कि संसार की सभी वस्तुओं का प्रभाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनो ही प्रकार का होता है | यह अलग बात है कि व्यक्ति केवल लाभ को ही देखता है | एक कार्य के लिए दो भिन्न – भिन्न प्रकार के यंत्रों को रखने से उनकी ऊर्जा शक्ति,  ध्वनी कम्पन और बल आपस में टकराने के कारण नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है जिससे कार्यों में सफलता नहीं मिलती बल्कि रुकावट होती है |

एक स्थान पर अनेकों यंत्रों की ऊर्जा शक्ति के प्रभाव से व्यक्ति के निजी सुखों पर पड़ता है | अनेकों प्रकार की ऊर्जाओं से उत्पन्न नकारात्मकता, और दुष्ट शक्तियों का बल अधिक कर देती है |

सावधानियां :

एक प्रकार से अधिक यंत्र का प्रयोग कभी भी ना करें |

कार्य सिद्धि के पश्चात यंत्र को तुरंत हटा दें |

रेखाचित्र की ऊर्जाशक्ति अवश्य जांच करें |

अक्षर की ध्वनी कम्पन अवश्य जांच करें |

यंत्र प्रयोग से पहले उचित सलाह अवश्य लें |

यंत्र का लाभ तभी है जब उससे सम्बंधित उचित अक्षर अथवा शब्द का उच्चारण किया जाए | यंत्र और शब्द का आपस में मेल नहीं होने से भी यंत्रों से नकारात्मक ऊर्जा निकलती है | 

 

इसी प्रकार मंत्रजाप से भी बढ़ता है गुस्सा !

मान्यता है कि मंत्रजाप अथवा किसी पूजा पाठ करने से मन निर्मल और शांत रहता है इसीलिए अधिकतर लोग अपनी दिनचर्या किसी मंत्रजाप या पूजा पाठ से आरम्भ करते है | यह भी कहा और माना जाता है कि मंत्र पढने से घर में प्रेम और सुख समृद्धि का वास होता है |

प्राय: लोग यह कहते मिलते है कि उनके घर में अधिक मंत्रजाप, नाम उच्चारण और पूजा पाठ होता है फिर भी परिवारजनों में गुस्सा है जिससे घर का वातावरण नकारात्मक और अशांति वाला है |

मंत्रजाप के बाद भी गुस्से और अशांति के दो मुख्य कारण होते है:

  • लक्ष्यहीन मंत्रजाप और पाठ पूजा करना |
  • मंत्रजाप वाले स्थान पर नकारामक शक्ति का प्रभाव होना |

कुछ लोग बिना किसी लक्ष्य के कोई मंत्रजाप अथवा पूजा को सालों तक करते रहते है | इस बात का उन्हें स्वयं भी पता नहीं होता है कि किस मंत्र, नाम या पाठ-पूजा को कितने समय के बाद नहीं करना चाहिए या उसे विराम देना अति आवश्यक है | सभी लोग यह जानते है कि कोई भी मंत्र, नाम, पाठ इत्यादि उच्चारण करने से विशेष प्रकार की ऊर्जा का प्रवाह होता है परन्तु लगभग सभी लोगों को यह ज्ञान नहीं है कि मंत्र, नाम इत्यादि पढने से जो ऊर्जा बनती है उसका सकारात्मक प्रयोग कैसे किया जाता है |

किसी मंत्रजाप से उत्पन्न हुई ऊर्जा का सकारात्मक प्रयोग नहीं कर पाने के कारण ही उसका नकारात्मक प्रभाव मंत्रजाप करने वाले व्यक्ति और उसके घर पर पड़ता है जिसका पहला मुख्य लक्षण गुस्सा आना और अशांति होना है | मंत्रजाप से पहले लक्ष्य होना और मंत्रजाप से बाद यह पता ज्ञान आवश्यक है कि इस ऊर्जा का सकारात्मक कैसे और कहाँ करना है अन्यथा मंत्रजाप से किसी बड़ी हानि होने की संभावना भी होती है क्योंकि आवश्यकता से अधिक उत्पन्न ऊर्जा पारिवारिक सुखों से वंचित करने में सक्षम होती है |

इस बात का ज्ञान भी सभी को नहीं है कि नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह अधिक होने पर बुरी नज़र, टोना टोटका, भूत प्रेत इत्यादि को अधिक बल मिलता है | लोगों को ईश्वर से यह शिकायत भी रहती है कि अधिक मंत्रजाप या पूजा पाठ करके भी नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव समाप्त नहीं होता है | इस बात पर सभी को विशेष ध्यान देना चाहिए कि दैनिक क्रियाओं में कैसे कर्म करना चाहिए और कैसे कर्म नहीं करना चाहिए | कहीं ऐसा तो नहीं कि मंत्रजाप या पाठ-पूजा करने से ही समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं |

 

आइए गहराई से समझ लेते है कि मंत्रों का नकारात्मक प्रभाव कैसे होता है !

संसार का प्रत्येक धार्मिक व्यक्ति किसी ना किसी मंत्र का उच्चारण अवश्य करता है | ऐसा प्रचलित है कि प्रत्येक मंत्र उच्चारण का अपना एक प्रभाव होता है जिससे वायुमंडल में सकारात्मक मंत्रशक्ति सक्रिय हो जाती है जिससे इच्छित फल की प्राप्ति होती है | ऐसी धारणा है कि सही उच्चारण से मंत्र का नकारात्मक प्रभाव कभी नही होता परन्तु यह पूर्ण सत्य नहीं है |

जब व्यक्ति समस्याओं से घिरा होता है तो वह जगह-जगह जाकर उपाय पूछता है जिसके लिए उसे कोई मंत्र दिया जाता है कि इसका जाप करने से समस्याओं का अंत होगा और जीवन में सुख-समृद्धि आएगी | मंत्रशक्ति के सक्रियता के कारण मंत्र का उच्चारण करने वाले अधिकतर लोग स्वयं और आसपास के माहौल में सकारात्मकता का अनुभव भी करते है |

व्यक्ति द्वारा मंत्रों से स्वयं उत्पन्न की गयी मंत्रशक्ति में सकारात्मक प्रभाव के साथ-साथ मंत्र का नकारात्मक प्रभाव भी होता है परन्तु साधारण व्यक्ति को मंत्रों की नकारात्मकता के बारे में ज्ञान नहीं है | मंत्रों के अधिक उच्चारण से व्यक्ति की समस्या समाप्त होने के स्थान पर एक और नयी समस्या उत्पन्न हो जाती है |

मंत्रों का उच्चारण लाखों वर्षों से हो रहा है फिर भी पुराने समय की तुलना में आज के समय में व्यक्ति की समस्याएं और दुविधाएं पहले से कई गुना अधिक है | यदि मंत्रों का केवल सकारात्मक प्रभाव ही होता तो बीते लाखों वर्षों में मनुष्यों द्वारा किए गए मंत्रो के उच्चारण से वायुमंडल में मंत्रशक्ति इतनी सक्रीय होती कि संसार के किसी व्यक्ति को कोई समस्या ही नहीं होती |

किसी मंत्र द्वारा किसी वस्तु को प्राप्त करने के साथ-साथ किसी दूसरी प्राप्त वस्तु की हानि होना निश्चित है | एक वस्तु को पाने के लिए उच्चारण किया गया मंत्र दूसरी वस्तु का अंत करता है क्योंकि मंत्रशक्ति सकारात्मक भी है और नकारात्मक भी है | किसी भी मंत्र द्वारा किसी लाभ विशेष पाने के साथ-साथ व्यक्ति को किसी सांसारिक सुख की हानि सहने के लिए तैयार रहना चाहिए |

किसी जीवित या मृत व्यक्ति का नाम बार-बार लेने से भी एक प्रकार की ऊर्जा उत्पन्न होती है जिससे लाभ और हानि दोनों होते है | जिस व्यक्ति का नाम लिया गया है उसके विचार,  गुण-अवगुण, रहन-सहन और उस पर सांसारिक प्रभाव, उसका नाम लेने वाले पर भी होता है | सांसारिक सुखों की प्राप्ति के लिए ऐसे व्यक्ति के नाम का उच्चारण नहीं करना चाहिए जिसका स्वयं का जीवन संघर्षमयी हो अन्यथा जीवन में समस्याओं और रुकावटों से सामना अधिक होगा |

सूर्य की ऊर्जा पृथ्वी के वातावरण के कारण लाभकारी है परन्तु इसकी ऊर्जा की अधिकता में पृथ्वी पर उपस्थित सभी कुछ भस्म करने की क्षमता है, इसी प्रकार मंत्र उच्चारण की अधिकता में सांसारिक सुखों की हानि करने की क्षमता है | जिस मंत्र के उच्चारण में लाभ होगा उसमे हानि अवश्य होगी, लाभ में हानि है और हानि में लाभ है |

 

Spells मंत्रघात से भी हानि होती है, आइये समझ लेते है कि मंत्रघात क्या है !

लगभग सभी लोग बुरी नज़र, जादू-टोना, भूत-प्रेत, नकारात्मकता इत्यादि के बारे में जानते है परन्तु अधिकतर लोगों को अभी तक मंत्रघात बारे में अधिक जानकारी नहीं है क्योंकि मंत्रघात इन सबसे भिन्न व अधिक रहस्यमयी है और इसकी जानकारी पुस्तकों में और इन्टरनेट पर उपलब्ध नहीं है | मंत्रघात अति प्रभावशाली होने पर भी प्रचलित नहीं है क्योंकि इसका प्रयोग साधारण व्यक्ति अनजाने में गुप्त तरीके से प्रतिदिन करता है |

पिछले अनेकों वर्षों से श्री विजय बतरा आध्यात्मिक और अदृश्य संसार पर काम कर रहे है  इसी कारण इन्होने अपनी शोध की हुई बहुत सारी रहस्यमयी जानकारी को विडियो, लेखों, पुस्तकों तथा इन्टरनेट के माध्यम से सभी तक पहुंचाने का प्रयास भी किया है | जब किसी व्यक्ति को ऐसे लक्षण हो जो बुरी नज़र नहीं है, ना ही किसी जादू-टोने का प्रभाव से है और जो भूत प्रेत इत्यादि के कारण से भी नहीं है तब यह मंत्रघात होने का लक्षण होता है और मंत्रघात केवल हानि करती है |

  • मंत्रघात अनजाने में ही क्यों और कैसे होता है ?
  • मंत्रघात होने पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए ?

मंत्रघात ऐसी नकारात्मक शक्ति है जो व्यक्ति की इच्छा और लक्ष्य के कारण उच्चारण किए मंत्रों द्वारा उत्पन्न होती है और यह केवल हानि करती है इसमें एक मुख्य बात यह भी है कि इसका प्रयोग अधिकतर लोग ज्ञान की कमी के कारण अनजाने में ही करते है और यह रहस्य समझने कि आवश्यकता है कि अनजाने में हुए मंत्रघात से व्यक्ति को स्वयं भी उतनी ही हानि होती है जितनी हानि दूसरों को होती है |

इसके कारण जीवन में अकारण समस्याएं और नकारात्मकता का सामना करना पड़ता है | मंत्रघात अति गुप्त और रहस्यमयी विज्ञान है इसी कारण प्रचलित उपाय, मंत्र, विधि, टोटकों इत्यादि से कोई भी लाभ नहीं मिलता | किसी समस्या के लिए व्यक्ति द्वारा किए गए अधिकतर मंत्र और उपाय इसलिए भी निष्फल हो जाते है क्योंकि मंत्रघात के प्रभाव को समाप्त करने और इससे बचने के लिए युति का सटीक ज्ञान अधिकतर लोगों को नहीं है | मंत्रघात से हो रही हानि से बचने के लिए सटीक ज्ञान और अति गोपनीयता से कार्य करने की आवश्यक है |

मंत्रघात के मुख्य लक्षण :

  • किसी भी मंत्र के उच्चारण से नकारात्मकता और समस्याओं का बढना
  • मुख से निकली सभी प्रकार की नकारात्मक बातों का सच हो जाना
  • धार्मिक क्रियाओं और पुण्य कर्मों का बिलकुल भी लाभ नहीं मिलना
  • किसी का कोई रोग या पीड़ा सुनकर, वही समस्या स्वयं को हो जाना

Napoo विश्व की एकमात्र ऐसी healing है जिसमें समस्त नकारात्मक शक्तियों का विस्तार ज्ञान होने के साथ-साथ मंत्रघात का भी ज्ञान है | मंत्रघात के लक्षण होने पर इसके प्रभाव को अति शीघ्र समाप्त करना आवश्यक है अन्यथा इसका नकारात्मक प्रभाव कई पीढ़ियों कर हानि करता है |

 

उपायों का भी नकारात्मक प्रभाव होता है आइये इसे भी समझ लेते है !

जो लोग दूसरों की समस्याओं का समाधान उपाय बताकर करते है या समाधान के लिए स्वयं किसी विधि या जाप का प्रयोग उपाय के रूप में करते है | समस्या के लिए दूसरों को उपाय बताने वाले लोगों को उपाय बताने के बदले गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है | इनमे मुख्य समस्या उनको शारीरिक और मानसिक पीड़ा होना और पारिवारिक सुख की कमी होना है | इसका मुख्य कारण यह है कि मार्गदर्शक के पास आने वाले व्यक्ति को बताये गए उपाय के साथ-साथ मार्गदर्शक स्वयं कोई उपाय नहीं करता | मार्गदर्शक व्यक्ति जिस भी ग्रह या देव का उपाय बताता है वह स्वयं उस ग्रह या देव के लिए कोई अतिरिक उपाय नहीं करता, कभी कभी तो मार्गदर्शक जिस ग्रह या देव के उपाय बताता है उनमे उसकी स्वयं की आस्था ही नहीं होती |

मार्गदर्शक उपाय बताकर बाधा समाप्त करने का यत्न करता है और यह समझता है कि ऐसा करना मेरा व्यवसाय है जिसके बदले मैंने धनराशी ले ली है और जातक की समस्या दूर होने पर मुझे अतिरिक्त लाभ पुण्यकर्म के रूप में भी मिलेगा | यदि ऐसा होता तो उपाय बताने या किसी बाधा पर कार्य करने वालों को तो कभी कोई समस्या ही नहीं होती क्योंकि उनके पुण्यकर्म तो दिन प्रतिदिन बढ़ रहे है |  मार्गदर्शक जिस भी ग्रह या देव का उपाय बताता है वह ग्रह या देव उस ग्रसित व्यक्ति को तभी छोड़ेंगे जब उनका हिसाब मार्गदर्शक स्वयं दे क्योंकि मार्गदर्शक समस्या और उपाय के बीच की कड़ी है |

ऐसा भी कहा जाता है कि ग्रह या देव पूजा अर्चना से प्रसन्न होते है और साथ ही यह भी कहा जाता है कि स्वार्थ में की गयी पूजा अर्चना का कोई लाभ नहीं होता, ऐसी पूजा अर्चना करने से तो नहीं करना अच्छा है | ग्रह या देव मार्गदर्शक के संबंधी नहीं हैं ना ही उसके सेवक है कि उसके बताये उपाय को करने से व्यक्ति की बाधा/समस्या भी दूर हो जाये और कर्मफल समाप्त भी हो जाये | पाप कर्मफल को समाप्त करने के लिए समस्या ग्रसित व्यक्ति के साथ साथ मार्गदर्शक अपनी ऊर्जा को कर्मफल समाप्त करने में लगाये तो ही वह उपायों के नकारात्मक प्रभाव से बच सकता है, अधिकतर मार्गदर्शक ऐसा नहीं करते |

यदि किसी का सही मार्गदर्शन करने से सकारात्मक प्रभाव है तो कर्मफल मिलने में बाधा बनने पर नकारात्मक प्रभाव भी है | आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो हर कर्म का एक फल होता है और वह फल तब तक समाप्त नहीं होता जब तक उसको पूरा भोगा नहीं जाये | जब कोई व्यक्ति मार्गदर्शक द्वारा बताई गयी विधि, उपाय, दान, पूजा इत्यादि को श्रद्धा से करता है तो उसकी बाधा/समस्या का प्रभाव मार्गदर्शक पर पड़ता है, क्योंकि मार्गदर्शक ने उस व्यक्ति ने बाधा की मध्यस्था की है इसलिए उसे भी बाधा का एक भाग अवश्य भोगना पडता है |

व्यक्ति का बिना भोगा कर्मफल मार्गदर्शक के हिस्से में आता है जिसके प्रभाव से मार्गदर्शक के जीवन में ऐसी समस्याएं भी आती है जो उसके भाग्य की नहीं होती हालाँकि दूसरे के कर्मफल को भोगने से पुण्यकर्म भी बनता है परन्तु सकारात्मक प्रभाव शीघ्र खर्च होता है | प्रत्येक मार्गदर्शक को स्वयं का इतना ज्ञान तो होता ही है कि वह कितने पानी में है और वह स्वयं कितनी कर्मपूँजी कमाता और खर्च करता है |

मार्गदर्शक जो भी उपाय बताता है उस उपाय का एक भाग उसे स्वयं भी करना चाहिए क्योंकि कर्मफल को भोग कर समाप्त करने की जवाबदेही मार्गदर्शक की होती है | यदि वह ऐसा नहीं करता तो इस जन्म या अगले किसी जन्म में दूसरों के भाग्य के कर्मफल उसके साथ साथ चलते है | ऐसे अनेकों व्यक्तियों का यह कहना है कि उन्होंने अपने जीवन काल में किसी का मन नहीं दुखाया और ना ही ऐसा कोई कर्म किया है जिसका उन्हें ऐसा दंड मिले | साधारण व्यक्ति भी अकारण उपाय बताने लगते है जिसके कारण समस्याओं का सामना करना पड़ता है | श्री विजय बतरा जी का ध्येय किसी की निंदा करना नहीं है, केवल सही मार्गदर्शन करना है |

 

समस्या के लिए प्रयोग करना भी हानिकारक होता है, आइये इसे भी विस्तार पूर्वक समझ लेते है !

सभी लोग अपनी दिनचर्या में कुछ ऐसे कार्य भी करते है जो उनकी समस्याओं और परिस्थिति में लाभ या हानि भी करते है | यह करने वाले व्यक्ति को भी पता नहीं होता कि उसे किसी विशेष प्रकार के वर्तमान कार्य के सकारात्मक फल मिलने से उसका जीवन सुगम चल रहा है या उसके किसी विशेष कार्य के नकारात्मक फल मिलने से जीवन में अधिक संघर्ष हो रहा है |

अब प्रश्न यह है कि ऐसे कौन से कार्य हैं जो प्रतिदिन किए जा सकते है जो सभी प्रकार की नकारात्मकता से बचाने के साथ-साथ भयमुक्त और भ्रममुक्त जीवन जीने में सहायक होते है और ऐसे कौन से प्रयोग होते हैं जिनको जानबूझ करने से समस्याएं समाप्त नहीं होती उलटा बढ जाती है |

आज के इलेक्ट्रॉनिक युग में अधिकतर लोग समस्या का उपाय नहीं, बल्कि उसके लिए प्रयोग बताते है, अब किस प्रयोग का क्या फल मिलेगा यह बताने वाले को भी नहीं पता होता क्योंकि इनमे अधिकतर प्रयोग तर्कहीन होते है | तर्क की अज्ञानता में प्रयोग बताने वाले व्यक्ति उन प्रयोगों के नकारात्मक प्रभाव के जवाबदेह नहीं होते क्योंकि उन्होंने किसी समस्या के लिए उपाय नहीं, केवल प्रयोग बताया है | प्रयोग करने वाले का समय प्रभाव और नकारात्मक परिस्थिति प्रयोग का फल हानिकारक होता है |

अपनी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए लोग इधर-उधर इसीलिए भी भटकते रहते है क्योंकि वे उपायों के स्थान पर प्रयोगों को करते है | इस बात को एक बार अवश्य सोचें कि पहले समय में इतने सारे प्रयोगों के बिना भी जीवन बहुत सुखी और आनंदित था | संसार में तार्किक उपायों की गिनती कम है जबकि संकटमय प्रयोग अनगिनत हैं | जीवन को सरल बनाने के लिए अधिक प्रयोगों के आवश्यकता नहीं है बल्कि ऐसे उपाय की आवश्यकता है जो बिना किसी हानि के समस्या को जड़ से समाप्त करे और परिस्थितियाँ अनुकूल करे |

व्यक्ति द्वारा आवश्यकता से अधिक प्रयोगों को करना अपनी समस्या को अधिक गंभीर करना है इसलिए कभी भी तर्कहीन या सुने सुनाए प्रयोग ना करें लाभ पाने के लिए सदैव तर्क आधारित उपाय ही करें | कुछ समस्याएं ऐसी होती है जिनको  लोग नहीं समझ सकते क्योंकि यह अदृश्य संसार से सम्बंधित होती है | कुदृष्टि, जादू-टोना, प्रेतात्मा इत्यादि के लक्षण तो सभी लोगों को पता होते है इन समस्यायों के लिए तर्कहीन या सुनेसुनाये प्रयोग करना नकारात्मक शक्तियों को अधिक बल देना है |

 

आइये यह भी समझें कि उपायों का फल क्यों नहीं मिलता है !

संसार का प्रत्येक व्यक्ति अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनेकों उपाय करता है परन्तु इनमे अधिकतर उपायों का कोई फल नहीं मिलता जिसके कारण किसी एक समस्या के लिए व्यक्ति बार-बार उपाय करता रहता है | कहा जाता है कि संसार में विश्वास से किया गया कोई भी कर्म निष्फल नहीं जाता, यदि ऐसा है तो फिर उपायों का फल क्यों नहीं मिलता क्योंकि हर उपाय पूरे विश्वास और श्रद्धा से किया जाता है |

अपना मन समझाने के लिए व्यक्ति स्वयं को अनेकों तर्क देता है जैसे इसी होनी में कुछ भलाई होगी, ईश्वर को यही मंज़ूर होगा, अभी समय नहीं आया होगा, इत्यादि | अपने मन को बहलाने से समस्या का समाधान नहीं होता, किसी इच्छित कार्य का पूरा होना ही केवल समस्या का समाधान है | आइये इसे विस्तार से समझते है कि उपायों का फल क्यों नहीं मिलता |

किसी उपाय का लाभ होना या नहीं होना इस बात पर भी निर्भर करता है कि उपाय बताने वाले व्यक्ति को उपायों का कितना ज्ञान है | यदि उसके उपायों का आधार अपने जीवन काल में सुनी-सुनाई बातें, इन्टरनेट से मिला अधूरा ज्ञान या भ्रमित करने वाली पुस्तकीय जानकारी है तो ऐसे अधिकतर उपायों का लाभ नहीं मिलता है | उपाय का लाभ तभी मिलता है जब व्यक्ति को समस्या का कारण और उपाय के तर्क एवं वास्तविकता का ज्ञान हो |

यदि उपाय का तार्किक ज्ञान हो तो बड़ी से बड़ी समस्या के लिए छोटा सा उपाय भी काफी है | पूर्ण तार्किक ज्ञान होने के लिए किसी गुरु द्वारा दिव्यज्ञान मिलना या अपना निजी शोध होना अति आवश्यक है | अनेकों लोग जिन्होंने उपायों को श्रद्धा और विश्वास से करते है परन्तु उनकी समस्याएं जस की तस बनी रहती है | उपायों के सम्पूर्ण ज्ञान नहीं होने पर भी लोग दूसरों को अधिक से अधिक उपाय बता देते है जबकि ऐसे उपायों को बताने और करने से अधिकतर लोगो को केवल हानि ही होती है |

यदि उपाय करने से व्यक्ति को कोई लाभ ना होता तो उपाय बताने का कार्य भी नहीं होता, इसका अर्थ है उपाय करने से लाभ अवश्य मिलता है | हर उपाय के पीछे एक तर्क या वैज्ञानिक कारण होता है यदि उपाय बताने वाले आने वाले व्यक्ति की समस्या को समाप्त करने के तर्क का ज्ञान हो तभी उपाय का फल जल्दी मिलता है | अधिकतर लोगों को अधिकतर बातों और उपायों का ज्ञान इन्टरनेट पर लिखा मिल जाता है, जो करने से उनको लाभ नहीं होता जिसका मुख्य कारण यह है कि उपाय बताने वाला हर व्यक्ति अपनी बात को दूसरों से बड़ी और सच्ची बताने के लिए उपायों को तोड़ मरोड़ रहे है जिसके कारण उपाय का मुख्य तर्क समाप्त हो जाता है और उपाय करने से लाभ होने के बजाय हानि भी हो जाती है |

जीवन में ऐसी बहुत सी समस्याएं आती है जो प्राय: लोग यह कहते भी है कि हमने इस जन्म में ऐसा कोई कार्य नहीं किया जिसकी इतनी बड़ी सजा हो फिर भी इतनी समस्याएं हैं | किसी को उपाय बताने से पहले यह समझ लें कि समस्या या बाधा का एक भाग स्वयं को भी भुगतना पड़ता है |  इसलिए उपाय बताने से पहले अपनी सुरक्षा कर ले जिससे उपायों को बताकर स्वयं को समस्या ना आए |

 

क्या आपने कभी पृथ्वी का उपाय किया है !

जीव का जन्म पृथ्वी पर होता है, पृथ्वी पर ही वह कर्म करता है और यहीं पर ही वह कर्म भोगता है, पृथ्वी पर ही जीव की मृत्यु होती है, कर्मों के आधार पर मृत्यु के बाद प्रेतयोनी पृथ्वी पर मिलती है और फिर अगला जन्म होना या मोक्ष मिलना भी पृथ्वी पर ही होता है | यदि सभी कुछ पृथ्वी पर ही होता है तो कोई भी व्यक्ति पृथ्वी ग्रह का उपाय क्यों नहीं करता !

जीव पर पृथ्वी का प्रभाव सबसे अधिक है | प्राय: यह भी कहा जाता है कि आत्मा मनुष्य जन्म सहित चौरासी लाख प्रकार के जन्म लेती है और इन सभी योनियों का वर्णन पृथ्वी पर ही है | प्रेतबाधा और ग्रहचाल, दोनों भिन्न भिन्न विषय है | ऐसा एक भी लिखित या मौखिक प्रमाण नहीं है जिससे यह निश्चित हो कि आत्मा किसी अन्य ग्रह पर जाकर कोई जन्म लेती है और फिर पृथ्वी पर आकर मनुष्य जन्म लेती है | यह भी सभी जानते है कि मृत्यु के बाद आत्मा ही प्रेतात्मा बनती है और बुरी नज़र, टोने-टोटके और प्रेतबाधा पृथ्वी पर रहने वाले जीवों को ही होती है |

इसका सीधा अर्थ यह है कि बुरी नज़र, टोने-टोटकों, नकारात्मकता और प्रेत बाधा का सम्बन्ध केवल पृथ्वी से है | यह स्पष्ट है कि प्रेत किसी अन्य ग्रह से नहीं आते है इसलिए प्रेत बाधा के लिए पृथ्वी के अतिरिक्त ग्रहों की गणना करना उचित नहीं है | पृथ्वी पर ही प्रेत बाधा के लिए क्रियाएं होती है उसके लिए किसी अन्य ग्रह पर नहीं जाना पड़ता है |

लोग ग्रहों की गणना करते है वो सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहू और केतू की गणना तो करते है परन्तु पृथ्वी की गणना नहीं करते, जीव पर पृथ्वी के सबसे अधिक प्रभाव है जिसको अनदेखा करना, गंभीर गणना-दोष माना जा सकता है | पृथ्वी की यह गणना करना अति आवश्यक है कि जीव कौन सा कर्म कर रहा है या कौन सा कर्मफल भोग रहा है | सभी ग्रहों के साथ पृथ्वी की गणना नहीं करने का अर्थ है कि आप जिस घर में रहते हो उसके बारे में ना सोच कर पड़ोसियों के घर का हिसाब लगाकर दुखी होते रहते हो | पृथ्वी से दूर के सभी ग्रहों  की गणना कर ली लेकिन जिस पर रहते हो उसका सोचा तक नहीं | यदि पृथ्वी की गणना करनी आ जाये तो सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों की गणना करना स्वत: आ जाती है | 

यदि पृथ्वी पर तत्वों द्वारा उपाय किया जाए तो पृथ्वी पर होने वाली समस्याओं का समाधान भी अपनेआप हो जायेगा | पृथ्वी पर सकारात्मक और नकारात्मक, दो प्रकार की ऊर्जाएं है और पृथ्वी पर उपस्थित सभी जीवों का शरीर पंचतत्वों से बना हुआ है इसलिए पृथ्वी ग्रह पर उपस्थित नकारात्मक ऊर्जा पंचतत्वों से बने शरीर के तत्वों के  संतुलन को बिगाड़ देती है जिससे जीव को अनिच्छित समस्याओं का सामना करना पड़ता है | पृथ्वी का उपाय करने में तत्वों का प्रयोग अनिवार्य है क्योंकि तत्वों के मिश्रण से शरीर का निर्माण पृथ्वी पर होता है | तत्व उपाय इसलिए भी अधिक कारगर होगा क्योंकि पृथ्वी पर होने वाली समस्या शरीर के पंचतत्व संतुलन बिगड़ने से हुआ है और इसका उपाय जीव द्वारा पृथ्वी पर रहते हुए ही होगा |

पृथ्वी पर चारों ओर नकारात्मक शक्तियां और हानिकारक ऊर्जाएं हैं इसलिए पुस्तकीय उपाय या सुने सुनाये टोटके करना उचित नहीं है, बहुत से लोग इन्टरनेट से पढ़कर या टेलीविज़न पर देखकर उपायों को करना शुरू कर देते है जो कभी भी लाभदायक नहीं है ऐसा करना हानिकारक होता है | यह ज्ञान भी सभी लोगों को नहीं है कि हर युग में समस्या और आवश्यकता बदलती रहती है जिसके अनुसार विधियों और उपायों में बदलाव होता रहता है इसलिए पुराने समय की समस्या के लिए हो चुका उपाय, आज की समस्या के लिए पूर्णत: कारगर नहीं है | नकारात्मक शक्ति का सही उपचार करने के लिए अधिक उपाय करने से होने वाली बड़ी गलती से बचना अति आवश्यक है इसलिए उपायों की अधिकता की नहीं बल्कि सटीकता पर ध्यान दें |

 

समस्या का भी एक तत्व है !

संसार में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं जिसे समस्या नहीं हो | मन को समझाने के लिए यह कह दिया जाता है कि पिछले जन्मों के कर्मों का फल है जो इस जन्म में भुगतना है परन्तु इतना कह देने से  समस्या का समाधान नहीं होता | समस्या के समाधान के लिए व्यक्ति तरह-तरह के प्रयत्न करता है परन्तु अधिकतर लोगों को केवल निराशा ही हाथ लगती है जिसके कारण व्यक्ति का विशवास और श्रद्धा डगमगा जाते है | समस्या का जड़ से समाप्त ना होने के पीछे एक रहस्यमयी कारण है |

हम सभी जानते है कि संसार में जो भी दृश्य-अदृशय उपस्थित है उन सभी में ऊर्जा है और उनका एक तत्व है | पहली बार सुनने में नया लगता है कि समस्यायों का भी तत्व होता है और केवल शरीर के तत्व को संतुलित करने मात्र से ही कर्मफल संतुलित हो जाता है, परन्तु यह सत्य है | श्री विजय बतरा “karmalogist” ने पिछले कई सालो के आध्यात्मिक शोध करके बताया है कि संसार में सभी समस्याओं की अपनी ऊर्जा होती है और उसका एक तत्व भी होता है जिसको संतुलित करने से व्यक्ति के जीवन में परेशानियां और दुविधाएं समाप्त हो जाती है |

यदि व्यक्ति को यह ज्ञान हो कि उसकी समस्या की ऊर्जा और उस समस्या का तत्व क्या है तो उसका समाधान करना अति सरल हो जाता है | समस्या द्वारा ही यह भी पता लगाया जा सकता है कि पिछले जन्मों में हो चुके कर्म की ऊर्जा और तत्व क्या था और आज किए जाने वाले कर्म का तत्व और उसकी ऊर्जा क्या है | किसी भी समस्या के तत्व और उसकी ऊर्जा को संतुलित करके कर्मफल के नकारात्मक प्रभाव को समाप्त किया जा सकता है | अपनी समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए समस्या की ऊर्जा और उसका तत्व जानकार उन्हें संतुलित करने की विधि सीखें |

कृपया ध्यान रहे कि Napoo तत्व चिकित्सा का सिद्धांत सीखे बिना समस्या के लिए तत्व प्रयोग करके शारीरिक तत्वों से छेड़छाड़ करना समस्या को अधिक बलवान करना भी हो सकता है जिसके परिणाम अति गंभीर हो सकते है इसलिए तत्वों का प्रयोग करने से पहले Napoo तत्व उपचार पद्धति अवश्य सीख ले | 

“विजय बतरा Karmalogist”

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Napoo Healing Therapy

नापू तत्व उपचार एक अद्वितीय पद्धति है इस अदभुत रहस्यमयी ज्ञान का प्रयोग नकारात्मक शक्तियों से स्थायी सुरक्षा के लिए करें | परिवार के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति की नकारात्मक शक्तियों से सम्बंधित समस्याओं के लिए इसका प्रयोग कभी ना करें अन्यथा उसकी नकारात्मकता आपको हानि कर सकती है |

Napoo तत्व चिकित्सा उपचार के दो भाग है, इसके पहले भाग में सभी प्रकार की सक्रीय नकारात्मक शक्तियों का पाठ्यक्रम है और दूसरे भाग में इनका गूढ़ तत्व आधारित उपचार  है | नकारात्मक शक्तियों से सम्बंधित समस्याओं के समाधान के लिए शरीर के सभी पांच तत्वों को संतुलित करने के लक्ष्य से श्री विजय बतरा “karmalogist” ने कई वर्षों के गहन शोध के बाद वर्ष 2004 में Napoo तत्व आधारित चिकित्सा आरम्भ की है और यह भारत और पश्चिमी देशों में नकारात्मक ऊर्जाओं और दुष्ट शक्तियों के लिए प्रसिद्द वैकल्पिक उपचार पद्धति मानी जाती है तथा इससे विश्व भर के लोगों को इच्छित लाभ हुआ है आप भी इसका लाभ अवश्य उठायें |

नापू से ग्रहों के बुरे  प्रभाव, दूसरों की नकारात्मक ऊर्जा तथा दुष्ट शक्तियों से हानि अपने आप समाप्त हो जाती है | Napoo चिकित्सा में सभी प्रकार की समस्याओं और दुखों के लिए केवल तत्व आधारित उपचार किया जाता है | Napoo तत्व चिकित्सा पद्धति से शरीर के सभी तत्वों को संतुलित कर दिया जाता है जिससे हर   प्रकार की समस्या (मानसिक, शारीरिक और सामाजिक) अपनेआप ही समाप्त हो जाती है | Napoo तत्व चिकित्सा सीखने के बाद इसका प्रयोग आप स्वयं कर सकते है | Napoo तत्व चिकित्सा पद्धति ही सुनिश्चित करती है कि कौन सी समस्या के लिए किस तत्व का (कितना और कैसे) प्रयोग करना चाहिए |

इस कार्य में ध्यान रखने वाली विशेष बात यह है कि किसी व्यक्ति की सहायता करने के लक्ष्य से बताये गए उपायों का भी नकारात्मक प्रभाव होता है | उद्धाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति ने कोई घर पर कब्ज़ा किया हुआ है और आप उसे एकदम अभी वो कब्ज़ा छोड़ने को कहेंगे तो वह व्यक्ति आपसे झगडा करेगा और घर के मालिक से भी पहले आपकी हानि करेगा, इसी प्रकार नकारात्मकता को समाप्त करने का तर्क नहीं आता हो तो उपाय बताना या उपाय करना अति हानिकारक होता है | बिना आज्ञा के दूसरों की नकारात्मकता का भार अपने ऊपर नहीं लेना चाहिए |

Napoo उपचार पद्धति का उपयोग कर सकते है :

  • जब कोई परिवार के सदस्यों के बीच संघर्ष पैदा करने के लिए नकारात्मक ऊर्जा का प्रयोग करता है
  • जब कोई पति-पत्नी के बीच अलगाव पैदा करने के लिए अनावश्यक कारण बनाता है
  • जब कोई आपकी सफलता को रोकने के लिए नकारात्मक शक्तियों के माध्यम से बाधा पैदा करता है
  • जब किसी की नकारात्मक ऊर्जा आपको शारीरिक रूप से हानि पहुँचाती है या आप हमेशा बीमार महसूस करते हैं, लेकिन चिकित्सा रिपोर्ट वास्तविक समस्या को पहचानने में विफल होती है
  • जब सभी अन्य चिकित्सा तकनीक नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं
  • जब कोई आपके मन और शरीर को नियंत्रित करता है और आपको गलत गतिविधियों या गलत फैसलों में खींचता है
  • जब सभी उपाय व आशीर्वाद निष्फल हों और शुभकर्म करने पर भी कोई सकारात्मक परिणाम प्राप्त नहीं होता है
  • जब कोई प्रार्थना या आशीर्वाद, नकारात्मक ऊर्जा और मस्तिष्क प्रोग्रामिंग के खिलाफ काम नहीं करता है
  • जब आपका मन सोचने में असमर्थ है, तो हमेशा भ्रमित और भयभीत है
  • जब आपकी आभा नकारात्मक शक्तियों को आकर्षित करता है जो मस्तिष्क और दुर्भाग्य का कारण बन जाता है
  • जब केवल नकारात्मक विचार सच हो जाते हैं और आप सकारात्मक सोचने में असमर्थ होते हैं
  • जब घर में नकारात्मकता और भारीपन महसूस हो रहा है, तो सभी रिश्तों में झगड़े, तर्क और मतभेद पैदा हो जाते हैं।
  • जब नकारात्मक ऊर्जा सभी कुछ स्थायी रूप से नियंत्रित कर लेती है जिससे चेहरे और घर की चमक समाप्त हो जाती है

निराकार और संसार के बीच में एक अदृश्य शक्तिसंसार है जिसमे असंख्य सकारात्मक और नकारात्मक शक्तियां है | व्यक्ति द्वारा जो भी सोचा, बोला, सुना और अनुभव किया जाता है वह सभी कुछ इसी संसार में ही उपस्थित है जिसे देखा भी जा सकता है |  प्रत्येक जीव को समय-समय पर अपने आसपास किसी सकारात्मक और नकारात्मक शक्ति का आभास भी होता है | इस बात में सभी लोग विश्वास करते है कि किसी कार्य होने में या कार्य में बाधा होने में, किसी ना किसी सकारात्मक या नकारात्मक शक्ति के होने की अहम् भूमिका होती है |

इसके अतिरिक्त भी अनेकों प्रश्न हैं जिनका उत्तर इन्टरनेट पर लिखना उचित नहीं है क्योंकि इसका दुरूपयोग हो सकता है | गुप्त संसार के रहस्यों में रुचि रखने वाले लोग, अपने सकारात्मक लक्ष्य के साथ, मुझे निजी रूप से मिलकर अद्वितीय ज्ञान अर्जित कर सकते है |

Napoo तत्व चिकित्सा सीखने और Napoo तत्व चिकित्सा उपचार के लिए संपर्क करें |

Contact for Napoo Healing & element based Napoo Remedies for all evil problems. 

Vijay Batra “Karmalogist”

Paschim Vihar, New Delhi – 110063, INDIA

Copyrights (C) All Rights Reserved. 

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Napoo : Element Based Therapy !

संसार की उत्पत्ति से आज तक के सभी युगों में तरह-तरह के बदलाव हुए है, इसमें मनुष्य के विचार, रहन-सहन, आवश्यकता, परिस्थिति, विवशता इत्यादि सभी कुछ बदला है | हर युग में जीवन की परिस्थितियों का सामना करने और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वैकल्पिक उपचार का प्रयोग भी होता रहा है |

एक गंभीर विचार करने वाली बात यह है कि समय के साथ बदल चुकी आवश्यकता और परिस्थिति के लिए वही पुराने समय की पद्धतियाँ लाभकारी हैं या नहीं, क्योंकि प्रकृति के नियम के अनुसार समय के साथ सभी कुछ बदलना आवश्यक है |

श्री विजय बतरा जी किसी धर्म, विज्ञान या व्यक्ति के विरुद्ध नहीं हैं वे केवल इतना कहते है कि समय बदलने के साथ सभी प्रकार के वैकल्पिक उपचार पद्धति यानी उपाय, मंत्र और यंत्र में बदलाव की आवश्यकता थी परन्तु पुरानी मान्यताओं के कारण मनुष्य इस पर कार्य ही नहीं किया जिसके कारण उन पुराने वैकल्पिक उपायों से आज की समस्याओं का पूर्ण समाधान नहीं हो पाता, जैसा पिछले युगों में होता था क्योंकि ये सभी विकल्प उस युग की समस्याओं के अनुसार ही बने थे |

मनुष्य को समय-समय पर प्रत्येक क्रिया में बदलाव लाना भी आवश्यक है | जिस प्रकार शारीरिक बीमारी की जांच और उपचार के लिए वर्तमान की आवश्यकता के अनुसार अनेकों प्रकार के बदलाव हुए है उसी प्रकार वर्तमान समय में नकारात्मकता, बुरी नज़र, टोना-टोटका, प्रेतात्मा सम्बंधित समस्याओं के समाधान के लिए भयमुक्त और अंधविश्वास रहित Napoo उपचार पद्धति विकसित की गयी है |

यदि आप बुरी दृष्टि, तंत्र-प्रहार, प्रेतात्मा, मंत्रघात, टोने-टोटके, नकारात्मकता, अभिशाप या ईर्ष्या करने वाले लोगों के कारण पीड़ा में हैं तो इन सभी प्रकार की समस्याओं को जड़ से समाप्त करने और तुरंत लाभ के लिए Napoo तत्व उपचार विधि का प्रयोग करें |  

सभी नकारात्मक शक्तियों और इनके उपचार के बारे में सटीक लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण टोने टोटकों इत्यादि को अंधविश्वास भी कहा जाता है | बुरी नज़र, टोने टोटके, मंत्रघात, प्रेतात्मा, यह सभी अलग-अलग प्रकार की समस्याएं है और इनकी उपचार विधि भी अलग होती है | जिन लोगों को बुरी नज़र बार-बार लगती हो उन पर टोने टोटकों का प्रभाव अधिक और तीव्र गति से होता है | परिवार में किसी एक व्यक्ति पर टोने टोटकों का प्रभाव होने पर यह प्रभाव धीरे धीरे सारे परिवार को हानि करने लगता है |

सभी टोने टोटके गोपनीय तरीके से किए जाते है इसलिए इनसे बचने के लिए सभी उपचार क्रियाएं गोपनीय होनी चाहिए अन्यथा सभी प्रकार के उपायों को करने का लाभ नहीं मिलता | किसी एक प्रकार के नकारात्मक प्रभाव को समाप्त करने के लिए अनेकों प्रकार के मंत्रों, तंत्रों और यंत्रों की आवश्यकता नहीं होती और ना ही नकारात्मक प्रभाव के लिए दैनिक पाठ-पूजा और मंत्रजाप से लाभ  होता है | व्यक्तिगत रूप से मिलकर समस्या के प्रभाव का आंकलन करके, उसके लिए Napoo नापू तत्व उपचार पद्धति बताई जाती है, तुरंत लाभ के लिए, समय समय पर  उपचार में तत्वों के बदलाव की आवश्यकता होती है |

Napoo तत्व उपचार निम्न परिस्थियों में अवश्य करें:

  • हर समय अकारण तनाव होना अथवा डर लगना
  • स्वयं को अकेला, असुरक्षित, असहाय महसूस करना
  • नींद ना आना अथवा सपने में मृतकों को देखना
  • गंदे या डरावने सपने आना अथवा नींद में डर लगना
  • बिना कारण रोना आना या कहीं भागने का मन करना
  • नकारात्मक विचार आना और नकारात्मक क्रियाएं करना
  • किसी व्यक्ति के घर पर आने के बाद अकारण कलेश होना
  • किसी व्यक्ति से मिलने पर शरीर भारी होना या बुखार होना
  • किसी भी वस्तु अथवा व्यक्ति तक पहुँचने में असफल रहना
  • किसी व्यक्ति द्वारा कुदृष्टि लगना, श्राप देना या टोटका करना
  • किसी अदृश्य शक्ति का आभास होना, सुनाई देना या दिखाई देना
  • परिवार सदस्यों में एक दूसरे के प्रति प्रेम और विश्वास में कमी होना
  • घर में सुख समृद्धि की कमी रहना और हमेशा किसी सदस्य का बीमार रहना

 इसके अतिरिक सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाओं और अदृश्य शक्तियों से स्थायी छुटकारा पाने के लिए नापू तात्विक उपचार का लाभ उठाएं और इसके बारे में अपने मित्रों को भी अवश्य बताएँ |

विशेष सावधानी :

  • सभी प्रकार के यंत्र, ताबीज, राख इत्यादि वस्तुओं को चलते पानी में बहा दें |
  • सभी प्रकार के उपायों, मंत्रों, पूजा-पाठ इत्यादि को तुरंत बंद कर दें |
  • शीघ्र परिणाम के लिए अपनी गुप्त तत्व पद्धति किसी को भी ना बतायें |

        Napoo  healing  में नकारात्मक शक्तियों की समाप्ति और स्थायी सुरक्षा के लिए तात्विक पद्धति सिखाई जाती है | यदि नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बहुत अधिक है तो तीव्र परिणामों के लिए नापू यंत्र और तत्व उपचार के अतिरिक्त गुप्त नापू मंत्र भी बताया जाता है | यह अति प्रभावशाली मंत्र तभी बताया जाता है जब नकारात्मक समस्या कई सालों पुरानी हो या फिर इसका प्रभाव पूरे परिवार पर हो | यह गुप्त मंत्र और इसकी तत्व उपचार का प्रयोग केवल व्यक्तिगत रूप से मिलकर ही सिखाई जाती है |

Napoo तत्व उपचार व्यक्ति पर नकारात्मक प्रभाव की गंभीरता को देखकर बताये जाते है | नापू सीखने के बाद इसका प्रयोग केवल स्वयं की सुरक्षा के लिए ही करें |

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नापू यंत्र निशुल्क प्राप्त करें !

Napoo Yantra का प्रयोग घर, ऑफिस, दुकान, स्टोर, गोदाम, फैक्ट्री, स्थानों पर करने से ग्रहों के नकारात्मक फल, बुरी नज़र (Evil eye), टोनाटोटका (Black Magic), मंत्रघात (Spells),  प्रेतात्मा (Spirit) और नकारात्मकता (Negativity) से स्थायी छुटकारा मिलता है |

Napoo यंत्र  

नापू यंत्र

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  • बुरी नज़र से बचने के लिए Napoo Yantra घर के मुख्य द्वार पर लगायें |
  • घर में सुख-शांति के लिए Napoo Yantra ड्राइंग रूम में लगायें |
  • निजी संबंधों में सुधार के लिए Napoo Yantra बेड रूम में लगायें |
  • बच्चों की सुरक्षा के लिए Napoo Yantra बच्चों के कमरे में लगायें |
  • कारोबार में तरक्की के लिए Napoo Yantra कार्यस्थल पर लगायें |

नापू यंत्र नि:शुल्क (Free of Cost) प्राप्त करने के लिए Napoo Yantra की image डाउनलोड कर सकते है | इसका Print निकालकर घर और कार्यस्थल पर लगाकर लाभ उठायें |

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Napoo Healing therapy सीखने के लिए संपर्क करें | 

Vijay Batra Karmalogist

You can also contact to Vijay Batra ‘Karmalogist’ (Founder of Napoo Foundation) to become Napoo Professional Healer and Napoo Partnership Program. (T&C)

Unique Features :

  • Participation certificate for Napoo healing course
  • Napoo healer certificate after remedial training
  • Free participation in workshops time to time
  • Remedial discussion on mobile to the learners
  • Legal Permission to open Napoo healing centre
  • Life-time support from Napoo foundation

Individual teaching and training available.

Napoo Healing

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