संसार की उत्पत्ति से आज तक के सभी युगों में तरह-तरह के बदलाव हुए है, इसमें मनुष्य के  विचार, रहन-सहन, आवश्यकता, परिस्थिति, विवशता इत्यादि सभी कुछ बदला है | हर युग में जीवन की परिस्थितियों और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के तंत्र, मंत्र और यंत्र का प्रयोग भी होता रहा है |

विचार करने वाली बात यह है कि समय के साथ बदल चुकी आवश्यकता और परिस्थिति के लिए वही पुराने समय वाले तंत्र, मंत्र और यंत्र लाभकारी हैं या नहीं, क्योंकि प्रकृति के नियम के अनुसार समय के साथ सभी कुछ बदलना आवश्यक है | Napoo healing किसी धर्म या व्यक्ति के विरुद्ध नहीं है|

हमारा कहना यह है कि समय के साथ तंत्र, मंत्र और यंत्र में बदलाव की आवश्यकता थी परन्तु पुरानी मान्यताओं के कारण मनुष्य इस पर कार्य ही नहीं किया जिसके कारण उन तंत्रों, मंत्रों और यंत्रों से आज की समस्याओं का पूर्ण समाधान नहीं हो पाता, जैसा पिछले युगों में होता था क्योंकि ये तंत्र, मंत्र और यंत्र उस युग के अनुसार ही बने थे |

जीवन केवल पुरानी मान्यताओं से नहीं चलता है इसके लिए मनुष्य को समय-समय पर प्रत्येक क्रिया में बदलाव लाना भी आवश्यक है | यह भी एक कटु सत्य है कि प्राचीन काल में बने तंत्र, मंत्र और यंत्र से आज की परिस्थितियों और आवश्यकताओं की पूर्ती नहीं होती क्योंकि वर्तमान युग के लिए आवश्यक नए तंत्र, मंत्र और यंत्र विकसित नहीं किए गए है |

  • जिस प्रकार शारीरिक बीमारी की जांच और उपचार के लिए अनेकों प्रकार के बदलाव हुए है उसी प्रकार तंत्र, मंत्र और यंत्र में नया शोध और नया निर्माण क्यों नहीं हो सका ?
  • सभी युगों में तंत्र, मंत्र और यंत्र की रचना और निर्माण किया गया तो वर्तमान युग में अभी तक ऐसा क्यों नहीं किया गया है ?

इसी बात को ध्यान में रखते हुए नापू हीलिंग द्वारा नकारात्मक शक्तियों से सम्बंधित सभी प्रकार की समस्याओं के लिए इस युग का नापू यंत्र की रच्बना की गयी है जो अति प्रभावकारी है और इसका प्रयोग करने वाले हजारों लोगों को शत-प्रतिशत लाभ भी हुआ है| कुछ लोग बिना ज्ञान के ही सुने-सुनाये तंत्रों, मंत्रों या यंत्रों का प्रयोग करने लगते है ऐसा करना अति घातक है, ऐसा करने से परिणाम इच्छा से विपरीत ही आते है |

संसार में सभी के लिए निश्चित आयु और समय है चाहे ये तंत्र, मंत्र और यंत्र ही क्यों ना हों | युग बीतने के साथ इनकी आयु भी समाप्त हो गयी है, यदि ऐसा नहीं होता तो एक युग के बाद दूसरे युग के समय में नए तंत्रों, मंत्रों और यंत्रों की रचना नहीं करनी पड़ती | हर युग में आवश्यकता के अनुसार इनकी रचना की गयी है |

एक कहावत है कि लोहे को लोहा कि काटता है इसलिए मेरा निजी विचार यह है कि आज के युग में मनुष्य को इस युग के तंत्र, मंत्र और यंत्र की आवश्यकता अधिक है जो वर्तमान परिस्थिति और आवश्यकता के अनुसार होने के साथ-साथ सटीक तर्क पर भी आधारित हो |

अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट पर पढ़ें : www.napoohealing.com

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