लगभग सभी लोग बुरी नज़र, जादू-टोना, भूत-प्रेत, नकारात्मकता इत्यादि के बारे में जानते है परन्तु अधिकतर लोगों को अभी तक मंत्रघात बारे में अधिक जानकारी नहीं है क्योंकि मंत्रघात इन सबसे भिन्न व अधिक रहस्यमयी है और इसकी जानकारी पुस्तकों में और इन्टरनेट पर उपलब्ध नहीं है | मंत्रघात अति प्रभावशाली होने पर भी प्रचलित नहीं है क्योंकि इसका प्रयोग साधारण व्यक्ति अनजाने में गुप्त तरीके से कर देता है |

पिछले अनेकों वर्षों से मैं आध्यात्मिक और अदृश्य संसार पर काम कर रहा हूँ,  इसी कारण मैंने अपनी शोध की हुई बहुत सारी रहस्यमयी जानकारी को विडियो, लेखों, पुस्तकों तथा इन्टरनेट के माध्यम से सभी तक पहुंचाने का प्रयास किया है | जब किसी व्यक्ति को ऐसे लक्षण हो जो बुरी नज़र नहीं है, ना ही किसी जादू-टोने का प्रभाव से है और जो भूत प्रेत इत्यादि के कारण से भी नहीं है तब यह मंत्रघात होने का लक्षण होता है और मंत्रघात केवल हानि करती है |

  • मंत्रघात अनजाने में ही क्यों और कैसे होता है ?
  • मंत्रघात होने पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए ?

मंत्रघात ऐसी नकारात्मक शक्ति है जो व्यक्ति की इच्छा और लक्ष्य के कारण सकारात्मक मंत्रों द्वारा उत्पन्न होती है और यह केवल हानि करती है इसमें एक मुख्य बात यह भी है कि इसका प्रयोग अधिकतर लोग ज्ञान की कमी के कारण अनजाने में ही करते है और यह रहस्य समझने कि आवश्यकता है कि अनजाने में हुए मंत्रघात से व्यक्ति को स्वयं भी उतनी ही हानि होती है जितनी हानि दूसरों को होती है |

इसके कारण जीवन में अकारण समस्याएं और नकारात्मकता का सामना करना पड़ता है | मंत्रघात अति गुप्त विज्ञान है जिसके बारे में अधिकतर लोगो को ज्ञान नहीं है क्योंकि यह कोई ज्योतिषीय या तांत्रिक मंत्र, विधि या उपाय नहीं है इसी कारण प्रचलित उपाय, मंत्र, विधि, टोटकों इत्यादि से कोई भी लाभ नहीं मिलता | किसी समस्या के लिए व्यक्ति द्वारा किए गए अधिकतर मंत्र और उपाय इसलिए भी निष्फल हो जाते है क्योंकि मंत्रघात के प्रभाव को समाप्त करने और इससे बचने के लिए युति का सटीक ज्ञान अधिकतर लोगों को नहीं है | मंत्रघात से हो रही हानि से बचने के लिए सटीक ज्ञान और अति गोपनीयता से कार्य करने की आवश्यक है |

मंत्रघात के मुख्य लक्षण :

  • किसी भी मंत्र के उच्चारण से नकारात्मकता और समस्याओं का बढना
  • मुख से निकली सभी प्रकार की नकारात्मक बातों का सच हो जाना
  • धार्मिक क्रियाओं और पुण्य कर्मों का बिलकुल भी लाभ नहीं मिलना
  • किसी का कोई रोग या पीड़ा सुनकर, वही समस्या स्वयं को हो जाना

 

नापू : विश्व की एकमात्र ऐसी शिक्षा प्रणाली है जिसमें भूत-प्रेत, बुरी नज़र, जादू-टोने का समस्त ज्ञान होने के साथ-साथ मंत्रघात का भी समस्त ज्ञान है | मंत्रघात के लक्षण होने पर इसके प्रभाव को अति शीघ्र समाप्त करना आवश्यक है क्योंकि इसका प्रभाव सभी प्रकार के सांसारिक सुखों से वंचित रखता है |

मंत्रघात के निवारण के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करें |

Napoo Foundation

 

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