संसार में ऐसे लोग भी है जो कभी भी किसी भ्रम में नहीं पड़ते और ना ही किसी प्रकार के प्रयोग अथवा मंत्र का सहारा लेते है फिर भी उनके जीवन में सांसारिक समस्याएं आने पर तुरंत अपनेआप समाधान हो जाता है | ऐसा भी कहा जा सकता है कि उन लोगों के पिछले कर्म बहुत अच्छे होंगे तभी ऐसा होता है परन्तु पिछले कर्मों के साथ-साथ वर्तमान कर्म भी कर्मफल को प्रभावित करता है |

सभी लोग अपनी दिनचर्या में कुछ ऐसे कार्य भी करते है जो उनकी समस्याओं और परिस्थिति में लाभ या हानि भी करते है | यह करने वाले व्यक्ति को भी पता नहीं होता कि उसे किसी विशेष प्रकार के वर्तमान कार्य के सकारात्मक फल मिलने से उसका जीवन सुगम चल रहा है या उसके किसी विशेष कार्य के नकारात्मक फल मिलने से जीवन में अधिक संघर्ष हो रहा है |

अब प्रश्न यह है कि ऐसे कौन से कार्य हैं जो प्रतिदिन किए जा सकते है जो सभी प्रकार की नकारात्मकता से बचाने के साथ-साथ भयमुक्त और भ्रममुक्त जीवन जीने में सहायक होते है और ऐसे कौन से प्रयोग होते हैं जिनको जानबूझ करने से समस्याएं समाप्त नहीं होती उलटा बढ जाती है |

इलेक्ट्रॉनिक के इस युग में स्वयं को अधिक ज्ञानी साबित करने के लिए तरह-तरह के प्रयोग बताने वालों के होड़ लगी हुई है परन्तु अधिकतर लोग समस्या का उपाय नहीं, बल्कि उसके लिए प्रयोग बताते है, अब किस प्रयोग का क्या फल मिलेगा यह बताने वाले को भी नहीं पता होता क्योंकि इनमे अधिकतर प्रयोग तर्कहीन होते है |

नए-नए प्रयोग बताने में उनका निजी लाभ यह है कि समस्या से ग्रसित लोग यह समझेंगे कि इस व्यक्ति के पास ज्ञान का भण्डार है इसलिए यह इतने अधिक प्रयोग बता रहा है | तर्क की अज्ञानता में प्रयोग बताने वाले व्यक्ति उन प्रयोगों के नकारात्मक प्रभाव के जवाबदेह नहीं होते क्योंकि उन्होंने किसी समस्या के लिए उपाय नहीं, केवल प्रयोग बताया है |

अपनी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए लोग इधर-उधर इसीलिए भी भटकते रहते है क्योंकि वे उपायों के स्थान पर प्रयोगों को करने में समय, धन और ऊर्जा को नष्ट करते है | इस बात को एक बार अवश्य सोचें कि पहले समय में इतने सारे प्रयोगों के बिना भी जीवन बहुत सुखी और आनंदित था | उपायों की गिनती कम है जबकि संकटमय प्रयोग अनगिनत हैं |

जीवन को सरल बनाने के लिए अधिक प्रयोगों के आवश्यकता नहीं है बल्कि ऐसे उपाय की आवश्यकता है जो बिना किसी हानि के समस्या को जड़ से समाप्त करे और परिस्थितियाँ अनुकूल करे | आवश्यकता से अधिक प्रयोगों का करना समस्या को अधिक गंभीर करना है इसलिए कभी भी तर्कहीन या सुने सुनाए प्रयोग ना करें |

कुछ समस्याएं ऐसी होती है जिनको प्रयोग बताने वाले लोग नहीं समझ सकते क्योंकि यह अदृश्य संसार से सम्बंधित होती है | कुदृष्टि, जादू-टोना, प्रेतात्मा इत्यादि के लक्षण तो सभी लोगों को पता होते है परन्तु इनके लिए सटीक उपाय का ज्ञान सभी को नहीं है और इन समस्यायों के लिए तर्कहीन या सुनेसुनाये प्रयोग करना प्रेतात्माओं को अधिक बल देना है |

व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए संपर्क करें |

Napoo Foundation

Advertisements